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आईटीआई की छात्राएं सिर पर मटका रखकर लाती हैं पीने के लिए पानी

छत्तीसगढ़ बलौदाबाजार जिला में लम्बे संघर्ष के बाद भटगांव में वर्ष 2011-12 में आईटीआई खुला है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से छात्र-छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आइटीआई में कंप्यूटर कोर्स कराए जाते हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में कम्प्यूटर नहीं है।

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आईटीआई की छात्राएं सिर पर मटका रखकर लाती हैं पीने के लिए पानी

आईटीआई की छात्राएं सिर पर मटका रखकर लाती हैं पीने के लिए पानी

भटगांव. छत्तीसगढ़ बलौदाबाजार जिला में लम्बे संघर्ष के बाद भटगांव में वर्ष 2011-12 में आईटीआई खुला है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से छात्र-छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आइटीआई में कंप्यूटर कोर्स कराए जाते हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में कम्प्यूटर नहीं है। जो कम्प्यूटर हैं, उसमें से अधिकतर बंद हैं। वर्ष 2011-12 में आईटीआई को मात्र सात कम्प्यूटर उपलब्ध कराया गया था, अब खराब हो चुके हैं। कम्प्यूटर उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रेक्टिकल नहीं हो पाता।
आइटीआई में कई समस्याओं का छात्र-छात्राओं को सामना करना पड़ रहा है। यहां के कार्यालय में एक भी लिपिक पदस्थ नहीं है। जिसके कारण शिक्षकों कार्यालय संबंधित कामकाज करना पड़ता है। आईटीआई में पानी की सुविधा तो है लेकिन गंदा पानी निकलने के कारण पानी पीने लायक नहीं है। जिसके कारण छात्राओं को भीषण गर्मी में सिर पर मटका रखकर पीने के पानी लाना पड़ रहा है। आईटीआई के पूर्व प्राचार्य द्वारा 5 नवम्बर 2015 को जिला कलेक्टर बलौदाबाजार को भूमि खसरा नं 446-1 रकबा 2, 89 हेक्टेयर आईटीआई के नाम दर्ज करने के संबंध में आवेदन दिया गया था। कलेक्टर द्वारा 10 अप्रैल 2017 को इश्तहार का प्रकाशन कर भूमि के संबंध में विभागों से अनापत्ति पत्र मंगाया गया था, लेकिन राजस्व विभाग द्वारा इस संबंध में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई और आज़ भी भूमि का आवंटन कार्य लटका हुआ है। आईटीआई में अभी कम्प्यूटर में 48, इलेक्ट्रिशियन 40, फिटर 40, वेल्डर 40 तथा डीजल मैकेनिक में 40 बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें। आईटीआई में पानी की सुविधा तो है लेकिन गंदा पानी निकलने के कारण पानी पीने लायक नहीं है।