4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जब शहर हमारा सोता है: पीयूष मिश्रा द्वारा लिखित नाटक की हुई प्रस्तुति, दर्शक दुबारा मंचन की करने लगे मांग

‘जब शहर हमारा सोता है...’ विषम चरणों के माध्यम से प्रेम और सच्ची करूणा का संदेश देता है। खंजर और फनियर दो समूह हैं, जमीन के टुकड़े के लिए कुछ विवाद होते हैं।

2 min read
Google source verification
pm.jpg

राजनांदगांव। पीयूष मिश्रा के द्वारा लिखे चुभते हुए संवाद और वरिष्ठ रंगकर्मी शरद श्रीवास्तव के कसे हुए निर्देशन में स्थानीय पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में सृजन रंगयात्रा द्वारा नाटक ‘जब शहर हमारा सोता है...!!’’ का सफल मंचन किया गया, जिसमें अतिथि के रूप में महापौर हेमा देशमुख, कमांडेंट शशिमोहन सिंह, पूनम विराट, कृष्णा श्रीवास्तव और परवेज खान उपस्थित थे। नाटक के कथानक, निर्देशन, अभिनय, मंचसज्जा, रूपसज्जा, वेशभूषा, संगीत और प्रकाश व्यवस्था को दर्शकों ने बेहद सराहा।

यह नाटक समाज में प्रेम और शांतिपूर्ण वातावरण के महत्व को दर्शाता है। यह ‘शहर...’ ढाई अक्षर का लफ्ज ईश्क के बारे में है। ‘शहर... ’ कबूतरों के बारे में है। ‘शहर..’ गुलाब की सुगंध, बगुले की फड़फड़ाहट, कोयल की चहचहाहट और मोर के नाच के बारे में है। ‘शहर...’ जवानी के सबसे पहले चुम्बन के बारे में है।

नाटक के निर्देशक शरद श्रीवास्तव बताते हैं कि, विगत तीन महिनों की लगातार रिहर्सल, पैंतीस कलाकारों की टीम और दो घंटे चालीस मिनट का समय को लेकर नाटक का मंचन आसान नहीं था। शहर में इतनी लंबी अवधि का यह पहला नाटक है, जिसमें ज्यादातर नए कलाकारों ने विभिन्न भूमिकाएं निभाई हैं। नगर के सुधि दर्शकों से नाटक को वाहवाही भी लगातार मिल रही है और दुबारा मंचन की भी मांग उठ रही है।

रंगकर्मियों को याद कर दी गई श्रद्धांजलि
रंगकर्म के क्षेत्र में अपनी अलहदा मिसाल कायम कर चुकी नगर की सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था सृजन रंगयात्रा द्वारा द ट्रायो के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में रंगकर्मी स्व. प्रमोद शर्मा, स्व. शोएब अली और स्व. रवि रंगारी को सृजन रंगयात्रा के कलाकारों द्वारा श्रद्धांजली भी दी गई। नाटक में अंटा, चींटा, ऐंवई, सूजा बावरा, डीजल, जैसे पात्रों को सृजन रंगयात्रा के कलाकार रागिनी स्वर्णकार, ललित मानकर, विपिन ठाकुर, आमोद श्रीवास्तव, विनोद गौतम, उत्कर्ष श्रीवास्तव, सुरभि श्रीवास्तव, नीरज उके, शाहरूख शेख, दीपिका दवे, नागेश पठारी, आर्यन हरिहारनो, काजल शुक्ला, आयुष श्रीवास्तव, राहुल शर्मा, भूमिका सिन्हा, नवीन निर्मलकर, आयुष शुक्ला, ऋषभ सिन्हा, निखिल फूले, सम्यक शेंडे और शरद श्रीवास्तव ने जीवंत किया। संगीत पक्ष में प्रशांत कुशवाहा, सोहिल रंगारी, हनी चावरे और बॉबी, मंच सज्जा ललित मानकर और प्रकाश व्यवस्था का कार्य अनिकेत महाजन के हाथों में था। मंच संचालन लोकेश शर्मा और आभार प्रदर्शन आलोक शर्मा ने किया।