
अंतरराष्ट्रीय साइक्लिस्ट हीरालाल यादव ने कल्पना चावला के पिता से बात की।
ताबीर हुसैन @ रायपुर।केटीयू के छात्रों को एक ऐसा मोटिवेशनल मैसेज सुनाया गया जिसका तसव्वुर उन्होंने कभी नहीं किया होगा। दरअसल, यहां आयोजित एक कार्यक्रम में अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के पिता बनारसी लाल चावला की आवाज गूंज रही थी। वे कह रहे थे मेरी बेटी ने स्पेस शटल क्रैश होने के पहले अपने एक मित्र को एक संदेश लिखा था कि सपनों से ही सफलता की राह लिखी जाती है। यह संदेश जीवन का आखिरी संदेश बनकर रह गया। वह पढ़-लिखकर देश का गौरव बनना चाहती थी और मैं आप सभी विद्यार्थियों के समक्ष अपनी बेटी की मन की बात रखते हुए यह आह्वान करना चाहता हूं कि आप सभी सपने देखें और पढ़-लिखकर उसे पूरा करें। कामयाब होकर देश व समाज के हित में कार्य करें और अपने राष्ट्र का गौरव बने। वे मोबाइल के जरिए जर्नलिजम के छात्रों को संबोधित कर रहे थे। मौका था कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क अध्ययन विभाग में सैनिकों की शौर्य गाथा एवं बलिदान तथा पर्यावरण संरक्षण विषय पर आयोजित कार्यक्रम का। यहां चीफ गेस्ट अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्री हीरालाल यादव थे। उन्होंने मोबाइल के जरिए कल्पना चावला का मैसेज उनके पिता से पहुंचाया। विशेष अतिथि कर्नल पी. एस अरोरा और चिकित्सक व समाजसेवी डॉ राकेश गुप्ता, विवि के कुलपति जी.आर चुरेंद्र व कुलसचिव डॉ आनंद शंकर बहादुर उपस्थित रहे। मंच संचालन चैताली पांडे ने किया।
देश की रक्षा के लिए सेना में ही रहना जरूरी नही
हीरालाल ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सेना में ही रहना जरूरी नहीं है, प्रत्येक व्यक्ति अपने फील्ड में महारत होकर भी समाज व राष्ट्र हित में अपनी भागीदारी प्रस्तुत कर सकता है। आप देश के सिपाहियों की तरह कलम की ताकत को अपना हथियार बनाएं और देश निर्माण तथा समाज निर्माण में बहुमूल्य योगदान दें। उन्होंने भारतीय सेना के शहीद जवानों की शौर्यवान वह कीर्तिवान गाथा का वर्णन कर विद्यार्थियों को प्रेरित कर देशप्रेम की भावना जागृत की। यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त देश के आदर्श कहे जाने वाले विभूतियों की जीवनी का वर्णन करते हुए उनके जीवन के संघर्षों की व्याख्या की।
Published on:
28 Feb 2020 01:17 am
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