
नक्सलियों से टक्कर लेते जवान हुआ शहीद, मासूमों को नहीं पता, अब नहीं आएंगे पापा
कांकेर. दंतेवाड़ा से दो सप्ताह पहले अपने दो मासूम बच्चों के साथ गृह गांव आई अमृता यादव को यह नहीं पता था कि पति रामकुमार अब कभी नहीं मिलेगा। रविवार को सुबह के समय फोन में रामकुमार से बातचीत के बाद दोपहर तक फोन लगाने का प्रयास की, लेकिन फोन नहीं लगा।
परिवार में मच गया कोहराम
अपराह्न करीब चार बजे कोतवाली से अघननगर पहुंची पुलिस ने यह बताया कि प्रधान आरक्षक रामकुमार माओवादी घटना में शहीद हो गए। यह आवाज सूनते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी अमृता, शहीद के माता-पिता और छोटे भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले में मातम छा गया। हर कोई ढांढसा देने घर पहुंच रहा था।
परिजनों ने बताया कि वर्ष-2008 में शहीद का विवाह हुआ था। शादी के कुछ वर्षों बाद अपनी पत्नी को अपने साथ ड्यूटी क्षेत्र में शासकीय क्वार्टर में निवासकर रहे थे। मासूम पांच साल की बेटी वंशिका यादव क्लास वन की छात्रा है, जो किरंदुल के एक स्कूल में अध्ययनरत है। ढाई साल का बेटा वैभव यादव अबोध बालक है। मृतक के पिता शिक्षा विभाग में भृत्य के पद पर थे। उसके छोटा भाई रामस्वरूप यादव बेरोजगार है।
विकास यात्रा के चलते नहीं मिली छुट्टी
परिजनों के मुताबिक शहीद अप्रैल माह से छुट्टी पर आने वाला था। विकास यात्रा के कार्यक्रम को देखते हुए, छुट्टी नहीं मिली। कुछ सप्ताह में विकासयात्रा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 25 मई तक घर आने वाला था। उच्चाधिकारियों ने उसकी छुट्टी स्वीकृत भी दे दी थी।
माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा में किरंदुल थाना क्षेत्र के मदाड़ी नाले के पास माओवादियों ने रविवार दोपहर विस्फोट कर एक्सयूवी वाहन को उड़ा दिया। वाहन में सवार जिला पुलिसबल के 5 जवान मौके पर ही शहीद हो गए। वहीं, गंभीर रूप से घायल दो जवानों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। माओवादियों ने जवानों के हथियार लूट लिए हैं।
Published on:
21 May 2018 01:16 pm
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