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Diwali 2021: दिवाली पर विभिन्न धर्मों की है अलग-अलग परंपराएं, जानिए इन 12 बिंदुओं में

Diwali 2021: दिवाली को लेकर विभिन्न धर्मों और समाज की अपनी अलग-अलग परंपराएं हैं। आइए जानते हैं इन 12 बिंदुओं में

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- नगर निगम में प्रशासनिक समिति की मैराथन बैठक

रायपुर. Diwali 2021: हर देवी-देवताओं के पूजन का विशेष दिन होता है। महालक्ष्मी पूजन का दिन गुरुवार है। इस बार इसी संयोग में गुरुवार को प्रीति और आयुष्मान योग में महालक्ष्मी का पूजन होगा। अर्थात दीपोत्सव पंच महायोग में मनेगा। घर-आंगन जगमग होंगे। महालक्ष्मी के स्वागत-वंदन में द्वार-द्वार रंगोली और धान की बालियों की झालर, तोरण और जिस केला पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है, वह दरवाजे के दोनों तरफ सजेगा। लेकिन क्या आपको मालूम है कि आज दिवाली को लेकर विभिन्न धर्मों और समाज की अपनी अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं हैं। आइए जानते हैं इन 12 बिंदुओं में

- दिवाली से एक दिन पहले भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया तो गोकुल वासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थी। जिसे नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
- भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद जब अयोध्या लौटे तो दीपमालाओं से स्वागत हुआ था। इसी दिन धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसुय यज्ञ किया, तब दीपमाला की गई थी।
- सम्राट अशोक का दिग्विजय अभियान इसी दिन आरंभ करने के अवसर पर दीपदान किया गया था।
- सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक इसी दिन हुआ था इसलिए दीप जलाकर खुशियां मनाई गई थी।
- जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को इसी दिन निर्वाण प्राप्त हुआ था। मोक्ष पर जाने से पहले महावीर स्वामी ने आधी रात को आखिरी बार उपदेश दिया था। मोक्ष के बाद जैन धर्मावलम्बियों ने दीपक जलाकर रोशनी की थी।
- सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह अपने 52 राजाओं को मुगल शासक जहांगीर की कैद ग्वालियर किले से छुड़ाकर हरमंदर साहिब अमृतसर पहुंचे थे। इसी दिन स्वर्ण मंदिर का शिलान्यास भी हुआ था । इस ख़ुशी में सिख समाज ने दीप मालाएं बनाई थीं।
- आइने अकबरी के अनुसार सम्राट अकबर दीपावली के दिन दौलत खाने के सामने सबसे ऊंचे स्तम्भ पर बड़ा सा आकाश दीप लटकाते थे।
- शाह आलम द्वितीय के शासनकाल में जश्न-ए-चिराग का त्योहार इतने व्यापक पैमाने पर मनाया जाता था कि तेल कम पड़ जाता था। पूरा महल दीपों से रोशन किया जाता था।
- सम्राट जहांगीर व बहादुर शाह जफर भी दिवाली धूमधाम से मनाते थे।
- बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान गौतम बुद्ध के स्वागत में उनके अनुयायियों ने इस दिन लाखों दीपक जलाए थे। आज भी बौद्ध इसी दिन अपने स्तूपों पर दीप जलाते हैं।
- आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद ने दिवाली के दिन ही शरीर को त्याग कर निर्वाण पाया था तब से इनके अनुयायी भी इस दिन दीप जलाते हैं।
- वेदांत के प्रचारक स्वामी रामतीर्थ इसी दिन धरा पर अवतरित हुए थे और इसी दिन शरीर का त्याग भी किए थे।