12 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जानें, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के दावेदार भूपेश और ताम्रध्वज में क्या है खास, क्या है इनकी ताकत और कमजोरी

प्रदेश की मजबूत विपक्षी पार्टी कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अब खींचतान शुरू हो गई है।

2 min read
Google source verification
Bhupesh Baghel,cg political,MP Tamradhawaj sahu,

रायपुर. प्रदेश की मजबूत विपक्षी पार्टी कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अब खींचतान शुरू हो गई है। अध्यक्ष नियुक्ति के लिए कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष भूपेश बघेल और दुर्ग जिले के सांसद ताम्रध्वज साहू इस रेस में आगे हैं।

कुर्मी समाज का गणित: प्रदेश में कुर्मी समाज की संख्या अच्छी खासी है। ऐसे में इस समाज का प्रदेश में काफी प्रभाव है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में कुर्मी समाज का विशेष दबदबा है। हर बार इस समाज चाहे मंत्री और विधायक रहते हैं। यह प्रदेश का सर्वाधिक वोटरों ओबीसी वर्ग है। भाजपा में जहां इस वर्ग से रमेश बैस हैं। वहीं कांग्र्रेस में भूपेश बघेल हैं।

साहू समाज का गणित: साहू समाज का भी कांग्रेस और भाजपा में अच्छा खासा प्रभुत्व है। इस समाज से भी हर बार मंत्री और विधायक रहते ही हैं। चाहे वह भाजपा के गरियाबंद जिले से अभनपुर के पूर्व विधायक चंद्रशेखर साहू हो या महासमुंद से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को हराकर सांसद बने चंदूलाल साहू, रायपुर ग्रामीण के पूर्व विधायक नंदकुमार साहू इसी वर्ग से आते हैं। वहीं देश और प्रदेश में मोदी लहर के बाजजूद दुर्ग जिले से भाजपा की पूर्व सांसद सरोज पांडेय को हराकर ताम्रध्वज साहू सांसद बने। अब साहू और कुर्मी दोनों ही समाज के लोग कांग्रेस अध्यक्ष पद पर आसीन कराने एड़ी चोटी एक किए हैं।

Read more: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के 1 साल पहले ही जोगी ने की उम्मीदवारों की घोषणा, सूची में 2 पूर्व विधायक और 1 आईएएस शामिल

जानें, कांग्रेस अध्यक्ष पद के दावेदारों की ताकत और कमजोरी-

भूपेश बघेल: मौजूदा अध्यक्ष भूपेश बघेल को फिर से जिम्मेदारी मिलने की संभावना ज्यादा है। पिछले पौने चार वर्षों में बघेल ने सरकार पर तीखे हमले किए हैं। संगठन को नए सिरे से सक्रिय किया है और बिखराव के बाद पार्टी के धड़ों को कुछ हद तक एक रखने में कामयाब रहे हैं।

ताकत: प्रदेश में कांग्रेस का जाना पहचाना चेहरा हैं। सर्वाधिक वोटरों वाले ओबीसी वर्ग से आते हैं। सरकार के खिलाफ आक्रामक होकर माहौल बनाया है। राहुल गांधी खुद घोषित कर चुके हैं कि अगला चुनाव भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।

Read more: दीपावली में मिठाई खरीदने से पहले रहें सावधान! ऐसे करें मिलावटी मिठाई की पहचान

कमजोरी: इनके व्यवहार से संगठन के कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं। जमीन विवाद से चार मामले जुड़े हैं। ऐसे में भाजपा सरकार उन्हें उलझाकर पार्टी के लिए मुसीबत भी खड़ी कर सकती हैं।

ताम्रध्वज साहू: मोदी लहर में भी कांग्रेस के पंजे पर लोकसभा गए ताम्रध्वज साहू अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। इसको लेकर वे दिल्ली में भी अपनी मंशा जता चुके हैं। कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व में एक धड़ा उनकी दावेदारी का समर्थन भी कर रहा है।

ताकत: पिछड़ा वर्ग मेंं साहू समाज सबसे बड़ा मतदाता है। करीब 25 लाख की आबादी इस समुदाय की है। इनमें से आधे लोगों को भाजपा और संघ समर्थक माना जाता है। साहू के बहाने इस समुदाय में कांग्रेस अधिक मजबूत होने की कोशिश करेगी। इनकी छवि अब तक अविवादित रही है।

कमजोरी: साहू की पहचान बेहद सीमित है। दुर्ग-रायपुर के अलावा प्रदेश के दूसरे हिस्से में उनका नाम और काम पहीचानने वाले बेहद कम लोग हैं। संगठन में कई धड़े उनको पचा पाने की स्थिति में नहीं हैं।

दूसरी तरफ, ब्राह्मण समाज से भी दावेदारी की चर्चा

साहू और कुर्मी समाज के अलावा ब्राह्मण समाज भी अपना इस पद पर अपना हक जमाने के लिए आगे हैं। इसमें रायपुर ग्रामीण विधायक सत्यनारायण शर्मा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे और पूर्व अध्यक्ष चरणदास महंत का नाम भी चर्चा में आगे है।