
रायपुर. यदि आप दीपावली में मिठाई खाने के शौकिन हैं तो सावधान रहिए। क्योंकि मिठाई खाने की लत आपको अस्पताल भी पहुंचा सकती है। इसलिए मिठाई खरीदने से पहले उसकी जांच करने के बाद ही मिठाई खरीदें। बाजार में इन दिनों मिलावटी मिठाई की भरमार है। बीते तीन साल में राजधानी में अमानक व मिलावटी खाद्य पदार्थों के 748 सैम्पल मिलावटी निकले।
इनमें से सिर्फ 426 प्रकरण ही कोर्ट में भेजे गए। इसमें से सिर्फ 199 दुकानदारों से मामूली जुर्माना वसूल कर कारोबार की छूट दे दी गई। मिठाई-मावे में मिलावट के २२७ प्रकरण अब भी विभाग की फाइलों में कैद हैं। राजधानी में मिलावट करने वाले किसी कारोबारी अथवा दुकानदार को जेल की सजा यानी कैद नहीं हुई है। 16 साल में खाद्य सामग्रियों में मिलावट के 5600 से ज्यादा केस आए।
इनका निपटारा सहायक जिला दण्डाधिकारी (एडीएम) कोर्ट से मामूली जुर्माना वसूल कर किया गया। जबकि, मिलावट के मामलों में 5 साल से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। आज तक गिनती के मामले ही जिला कोर्टों में दायर किए गए। बीते तीन वर्षों में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्य पदार्थों के 2670 नमूने लेकर सरकारी प्रयोगशाला में जांच कराई गई, जिसमें से 748 में मिलावट पाया गया। मिलावटखोरों से महज 46 लाख 43 हजार रुपए वसूलकर फिर से कारोबार की छूट दे दी गई।
204 सैम्पलों में पाए गए जानलेवा तत्व
204 सैंपल की जांच रिपोर्ट के मुताबिक इनमें मिले तत्व सेहत के लिए खतरनाक होने के साथ ही जानलेवा पाए गए हैं। जो सैंपल फेल हुए हैं, उनमें पका हुआ चावल, दाल, पुलाव, पनीर, सूप आदि शामिल है। इनमें विभाग केस बनाकर एडीएम की कोर्ट में पेश करेंगे। उसके बाद सुनवाई शुरू होगी। तब जाकर फैसला लिया जाएगा कि जिनके खिलाफ केस हैं। वे दोषी हैं या नहीं।
अब तक नहीं आए फैसले
असुरक्षित खाद्य सामग्री व बिना लाइसेंस लिए सामान बनाने व बेचने पर जुर्माना से लेकर सजा का प्रावधान है। प्रदेश में अब तक किसी को सजा नहीं हुई है, कुछ केस में जुर्माना ही लगा है। अफसरों ने बताया कि डेढ़ साल पहले जगदलपुर में मैगी की मिस ब्रांडिंग में दो-दो लाख रुपए जुर्माना वसूला गया था। रायपुर में घुन लगी अरहर दाल, गंदा व बासी समोसा , लाखड़ी दाल वाला बेसन तथा गुटखे का केस 2012 में पेश किया गया था, लेकिन फैसला आना बाकी है।
जांच फेल होने पर जुर्माना या अन्य सजा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी समय-समय पर दुकानों से खाद्य सामग्री का सैंपल लेते रहते हैं। उसे जांच के लिए लैब में भेजते हैं। जांच में फेल होने पर कार्रवाई के लिए उसकी रिपोर्ट एडीएम या सीजीएम के पास भेजी जाती है। वहां से जुर्माना या अन्य सजा होती है।
अश्वनी देवांगन, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
Updated on:
07 Oct 2017 01:03 pm
Published on:
07 Oct 2017 12:50 pm
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