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छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क पूरी दुनिया में अपने आरामदायक टेक्सचर के लिए जाना जाता है। प्रदेश में विदेशी पर्यटकों के आगमन के साथ ही यहां की कोसा सिल्क साड़ियों के निर्यात में दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है. छत्तीसगढ़ के चांपा जिले में निर्मित कोसा सिल्क को दुनिया के सबसे अच्छे सिल्क में शुमार किया जाता है।
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क्या है कोसा की खासियत
कोसा सिल्क प्रदेश के कोरबा और चांपा जिले में मुख्य रूप से तैयार किया जाता है। यह बेहद मजबूत होता है और पूरी दुनिया में अपने नर्म टेक्स्चर के लिए जाना जाता है। यह सिल्क के सबसे शुद्ध प्रकारों में गिना जाता है। इसकी खासियत इसके रंग हैं। कोसा सिल्क प्राकृतिक रूप से हल्के गोल्डन रंग में मिलता है जिसे पलाश, लाख और गुलाब की पंखुडिय़ों से बने रंगों से डाई किया जाता है।
कैसे बनता है कोसा सिल्क
इन तितलियों के लार्वा से बने कोकून को जंगलों से इकट्ठा किया जाता है। इनमें से अच्छे कोकूनों को चुन कर उन्हें उबाला जाता है। उबालने के बाद इनसे रेशम का धागा निकाला जाता है। इस व्यवसाय से जुडे लोगों के अनुसार 7 से 8 कोकून से मिलाकर 1 पूरा लम्बा धागा तैयार होता है। इसके बाद धागे में रंग लगाया जाता है। सूखने के बाद धागे को लपेट कर एक गड्डी बनाई जाती है जिसके बाद इस धागे से साडिय़ों को तैयार किया जाता है। ग्रामीण प्राकृतिक रंगों से सिल्क को रंगते हैं। कोसा सिल्क की एक साड़ी को तैयार करने में 7 से 8 दिन लगते हैं।
सिर्फ साड़ी नहीं डिजाइनर आउटफिट्स भी होते हैं तैयार
पारंपरिक रूप से कोसा से सिर्फ साड़ियां बनाई जाती थीं लेकिन अब इससे लहंगे भी बनाए जाते हैं। विदेशों में कोसा सिल्क के कपड़ों से कई तरह के डिजाइनर वेस्टर्न आउटफिट्स भी तैयार किये जाते हैं।
Published on:
22 Nov 2022 02:32 pm
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