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मजदूर का बेटा जर्मनी में कार्बनिक रसायन पर करेगा रिसर्च

दूसरे राज्यों में मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाता था

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मजदूर का बेटा जर्मनी में कार्बनिक रसायन पर करेगा रिसर्च

मजदूर का बेटा जर्मनी में कार्बनिक रसायन पर करेगा रिसर्च

जांजगीर.हसौद. जिस हाथ से मजदूर ने लगातार 20 साल तक जम्मू कश्मीर में मजदूरी कर ईंट बनाए आज वही हाथ से मिली मजदूरी के पैसे से बेटे को डॉक्टर बना डाला। वह भी ऐस वैसे डॉक्टर नहीं बल्कि जर्मनी में यह बेटा कार्बनिक रसायन में रिसर्च भी करेगा। दिलचस्प यह है कि जो बेटा जर्मनी गया है वह भी आज से 15 साल पहले खुद मजदूरी में अपने माता पिता के काम में हाथ बंटाता था। आज उसकी इस उपलब्धि से क्षेत्र के लोगों में नाज है।
कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाता है। कुछ ऐसी कहानी जैजैपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत झालरौदा में एक गरीब परिवार में जन्मे किसान का बेटे की है। दरअसल बुधराम बंजारे की आज से एक दशक पहले उसकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। वह लगातार 20 साल तक मजदूरी के लिए जम्मू कश्मीर जाया करता था। धीरे धीरे कर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृण होते गई। मजदूरी के पैसे से बुधराम ने अपने बेटे को ऐसा पढ़ाई लिखाई कराई कि उसने देश के टॉप होनहारों में सलेक्ट होकर देश नहीं बल्कि जर्मनी में सोध के लिए चला गया। डॉ श्याम बंजारे की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा गृह ग्राम झालरौंदा में हुई। डॉ श्याम की 10वीं 12वीं की पढ़ाई महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल भोथिया से हुआ है। बीएससी की पढ़ाई चांपा के सरकारी कॉलेज से किया। फिर एमएससी रसायन शास्त्र की पढ़ाई शासकीय साइंस कॉलेज बिलासपुर से किया। इसके बाद वह पीछे पलटकर नहीं देखा। कड़ी मेहनत से लगातार पढ़ाई करता गया और अब जर्मनी में भारत का नाम रोशन करेगा।
ऐसे बढ़ी आर्थिक स्थिति: एक समय बुधराम बंजारे के घर की माली स्थिति ऐसी थी कि दो जून के खाने के लिए लाले था। घर की स्थिति को देखते हुए उन्हें जम्मू कश्मीर पलायन करना पड़ा था। मजदूरी की राशि से धीरे.धीरे गांव में कृषि भूमि खरीदे। फिर कृषि कार्य में मिली राशि से अपने बाल बच्चों को पढ़ाया लिखाया। आज उनके बाल बच्चे देश का नाम रोशन करने जा रहा है। डॉ श्याम के पिता बुधराम के दो पुत्रों में डॉ् श्याम बंजारे बड़ा पुत्र है। जो अपने माता पिता के खून पसीने की कमाई को देखकर कड़ी मेहनत करते हुए पढ़ाई किया। फि र उसे डॉक्टरेट की उपाधि मिल गई।