भाजपा ने पिछड़ा वर्ग से आने वाली वर्मा को उम्मीदवार बनाकर ओबीसी वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, जबकि कांग्रेस ने आदिवासी नेता नेताम को दोबारा मौका देकर अपने पारंपरिक आदिवासी आधार को मजबूत करने का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दोनों दलों का यह फैसला केवल एक सीट जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।