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विधानसभा मानसून सत्र: अंतिम दिन आरोप और हंगामें के साथ गिरा अविश्वास प्रस्ताव

14 घंटे बहस के बाद रात 2 बजे ध्वनिमत से गिरा अविश्वास प्रस्ताव

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विधानसभा मानसून सत्र: अंतिम दिन आरोप और हंगामें के साथ गिरा अविश्वास प्रस्ताव

रायपुर. विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा, प्रदेश की जनता में सरकार के प्रति अविश्वास है। इसलिए मुख्यमंत्री को विकास यात्रा के नाम पर दर-दर घूमना पड़ रहा है। यहां दो बार प्रधानमंत्री और एक बार अमित शाह भी आए गए हैं। सरकार जनता की कमाई पर राजनीति करना चाहती है।

उन्होंने कहा, जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है। किसानों को कोर्ट जाना पड़ रहा है। 13 साल बाद भी तकनीकी शिक्षा संचालनालय भर्ती का नियम नहीं बना सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मड़वा प्रोजेक्ट के नाम पर 3 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। देरी के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रदेश में नौकरशाह हावी है, लेकिन इस बार बदलाव की हवा चल रही है।

कांग्रेस विधायक रामदयाल उइके ने कहा, 14 साल में छत्तीसगढ़ को चरागाह बनाया दिया है। आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों को बेची जा रही है। भारी-भरकम 90 हजार करोड़ के बजट के बाद भी छत्तीसगढि़यों को लूटा जा रहा है। बजट का आधा पैसा कमीशन में जा रहा है, तो गरीबों का कैसे भला होगा। उन्होंने कहा, ट्राइबल विभाग को एजुकेशन विभाग में मर्ज कर सरकार ने आदिवासियों के साथ सबसे बड़ा धोखा किया है।

भाजपा विधायक देवजी भाई पटेल ने कहा, इतना लचर और तथ्यहीन अविश्वास प्रस्ताव कभी नहीं देखा है। मुख्यमंत्री के तीन कार्यकाल प्रजातंत्र के जनमत का परिणाम है न कि किसी के द्वारा दिया गया उपहार। बार-बार अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से जनमत का गला घोटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, यह अविश्वास प्रस्ताव जनता के दुख: दर्द के लिए नहीं, बल्कि तुच्छ स्वर्थ के लिए हैं। सीडी कांड अविश्वास प्रस्ताव का पहला बिंदु है। इसी से पता चलता है कि विपक्ष के पास किस तरह मुद्दे का अभाव है। आरोपों के बिंदु में चिंतन और सोच होनी चाहिए। एेसा तब हो सकता है, जब आप को आंकड़ों की परख हो। एक ही तथ्य को बार-बार लाना इनकी नीति बन गई है।

कांग्रेस विधायक अमरजीत भगत ने कहा, छत्तीसगढ़ के किसान कर्ज में दब गए हैं और सरकार सिर्फ आश्वासन तक सीमित रह गई है। कर्नाटक में चंद दिनों पहले बनी सरकार ने वहां के किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। मैं पूछना चाहता हूं कि यहां की सरकार ने कितने किसानों का कर्ज माफ किया है। यह हमारे लिए शर्म की बात है। सरकार ने अधिकारियों को बीजेपी का कार्यकर्ता बना दिया है। सिर्फ पट्टा लगाना बाकी है। अफसर भीड़ जुटाने का काम कर रहे हैं और इसके आधार पर उन्हें नम्बर मिलता है।

बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड को दे दी आदिवासियों की जमीन

रायपुर. मानसून सत्र के अंतिम दिन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को आवंटित किए जाने का मामला उठाया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांकेर जिले के दुर्ग कोंदल इलाके में निवासरत एक आदिवासी की जमीन बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड को आवंटित कर दी गई है। इसके अलावा रायगढ़ जिले ग्राम बैहामुड़ा में भी अनुसूचित जनजाति के दो व्यक्तियों की भूमि को जनमित्रम कल्याण समिति नाम की एक संस्था को 30 वर्ष की लीज पर दे दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष कहा कि सरकार ने आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासियों को आवंटित नहीं करने का कानून बनाया था, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।

नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डे ने कहा कि अधिसूचित और गैर अधिसूचित दोनों क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन किसी को भी पट्टे पर दे सकता है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1949 की धारा 165 की उप धारा ( 6 ) के तहत केवल प्रतिबंधित पट्टे को शामिल नहीं किया गया है। राजस्व मंत्री ने कहा कि यह कानून काफी पहले से हैं इसे राजनीति से नहीं जोडऩा चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनकी चिंता में आदिवासी शामिल है और लीज के बहाने आदिवासियों का हक मारा जा रहा है।