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Lata Mangeshkar Death Anniversary: स्वर कोकिला का छत्तीसगढ़ से जुड़ा है नाता, एक मात्र छत्तीसगढ़ी गाना जो लता मंगेशकर ने गाया

Lata Mangeshkar Death Anniversary: भारत रत्न लता मंगेशकर की आज पहली पुण्यतिथि हैं. आज उनके निधन को एक साल पूरा हो गया हैं. लता मंगेशकर ने अपने जीवन में 50 हज़ार से ज्यादा गाने गए हैं. संगीत की दुनिया की वें सर्वोच्च शख्सियत थी, कोई ऐसा सम्मान नहीं था जो उन्हें न मिला हो. लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था. उनके पिताजी फेमस मराठी थिएटर आर्टिस्ट, मराठी और कोंकणी म्यूजिशियन और क्लासिकल सिंगर थे. लता मंगेशकर का बचपन का नाम हेमा था.

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Lata Mangeshkar Death Anniversary: रायपुर॰ स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन को आज एक साल हो गया है. उनकी पहली पुण्यतिथि पर आज उन्हें पूरा देश श्रद्धांजली दे रहा है. हफ्तों तक अस्पताल में रहने के बाद लता मंगेशकर 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. लता दीदी ने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली सहित छत्तीस से अधिक भारतीय भाषाओं में गाने गाए. इसके अलावा उन्होंने विदेशी भाषाओं अंग्रेजी, इंडोनेशियाई, रूसी, डच, नेपाली और स्वाहिली में गाना गाया.

लता मंगेशकर का छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी से भी नाता जुड़ा था. 36 भाषाओं में 50 हजार गाने गाने वाली लता ताई ने छत्तीसगढ़ी में एकमात्र गाना भकला फिल्म के लिए 'छूट जाही अंगना दुवारी' 17 साल पहले गाया था. जो आज भी लोग शादी विवाह के दौरान विदाई में गुनगुनाया करते हैं.

दरअसल 16 साल पहले यानी 22 फरवरी 2005 को मुंबई के स्टूडियो में लता दीदी ने छत्तीसगढ़ी गीत छूट जाही अंगना अटारी.... छूटही बाबू के पिठइया की रिकॉर्डिंग की थी. शादी के बाद बेटी की विदाई पर गाए जाने वाले इस गीत को मदन शर्मा लिखा था और संगीत कल्याण सेन ने दिया था. ये एकमात्र ऐसा छत्तीसगढ़ी गीत है जिसे लता मंगेशकर ने गाया हैं.

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से गहरा नाता
भारतरत्न दिवंगत लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से पुराना और गहरा नाता रहा है. वह इस विश्वविद्यालय को कला और संगीत के लिए गुरुकुल की दृष्टि से देखती थीं. खैरागढ प्रवास के दौरान उन्हें मानद डी लिट् की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है. वर्तमान में विश्वविद्यालय की कुलपति ममता चंद्राकर उस वक्त खैरागढ में छात्रा थी.