2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वायरल खबर का सच: सोशल मीडिया पर झकझोर देने वाली इस खबर का ये है सच

पिछले करीब एक सप्ताह से सोशल मीडिया में 4 बच्चों को गोद लेने की अपील वाले वायरल खबर की हकीकत कुछ और निकली।

2 min read
Google source verification
viral news

वायरल खबर का सच: सोशल मीडिया पर झकझोर देने वाली इस खबर का ये है सच

दिनेश यदु/रायपुर. पिछले करीब एक सप्ताह से सोशल मीडिया में 4 बच्चों को गोद लेने की अपील वाले वायरल खबर की हकीकत कुछ और निकली। यह जरूर है कि बच्चों के सिर से उनके माता-पिता का साया उठ गया है, लेकिन उनकी देखभाल दादा-दादी कर रहे हैं।

बच्चों के मजदूर माता-पिता के आकस्मिक मौत की कहानी मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली है। परिवार की इस दशा का दोषी शराब है। राजधानी से 60 किलोमीटर दूर हिरमी गांव निवासी सुरेश साहू ने शराब पीने से माली हालत खराब होने के गम में फांसी लगाकर इस साल १८ मार्च को जान दे दी। उनकी गर्भवती पत्नी सुनिता साहू का निधन प्रसव के दौरान निमोनिया के कारण हो गया।

शराब पीने को लेकर दम्पती में अक्सर कलह होता था। सुरेश की खुदकुशी के थोड़े ही देर बाद उनके बड़े भाई संतोष साहू को दिल का दौरा पड़ा और उनकी जान चली गई। एक साथ आई एेसी विपत्ति ने परिवार को तोड़कर रख दिया। मृतकों के बाकी ३ भाई रायपुर में रोजी-मजदूरी करते हैं।

दादा-दादी संभाल रहे बच्चों को
सुरेश के पिता का कहना है भले ही हमारी आर्थिक स्थिति खराब है। फिर भीबच्चों के लालन-पालन में हम सक्षम हैं। जिसने फोटो खींचकर गलत खबर फैलाई, उसने हमे कुछ बताया ही नहीं। गांव के सरपंच ने भी हमारी आर्थिक मदद की।

दूधमुंही बच्ची को एसओएस में रखना चाहते हैं सरपंच
हिरमी सरपंच रवि अनंत ने कहा, महिला की मौत के बाद उनकी दूधमुंही बच्ची को बलौदाबाजार स्थित जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्ची के सिर में इंफेक्शन होने की बात कहकर आंबेडकर अस्पताल रिफर कर दिया। पंच, सरपंच का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके चलते बाल संरक्षण अधिकारी से बात करके दूधमुंही बच्ची को एसओएस बाल ग्राम भेज सकते हैं।

बलौदाबाजार के बाल संरक्षण अधिकारी प्रकाश दास ने कहा कि हिरमी की घटना जानकारी में आई थी। हमने तुरंत छोटी बच्ची को हास्पिटल में भर्ती कराया। बच्चों के दादा-दादी बहुत वृद्ध हैं। अगर दादा-दादी रखना चाहें, तो गोदनामा के जरिए रख सकते हैं। नहीं तो बच्चों को हम अपने संरक्षण मे रखकर उचित शिक्षा व भरण पोषण करेंगे।