5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Lohri 2023: फसल काटने की ख़ुशी मनाई जाने वाला पर्व, आज रात को पंजाबी समाज मनाएगा लोहड़ी

Lohri 2023: हर उम्र के लोगों को गिफ्ट देने की परंपरा है। लोहड़ी में गजक, रेवड़ी, मुंगफली आदि खाई जाती हैं और इन्ही के पकवान भी बनाये जाते हैं। इसमें विशेषरूप से सरसों का साग और मक्का की रोटी बनाई जाती हैं और खाई एवम प्यार से अपनों को खिलाई जाती हैं।

2 min read
Google source verification
lohri.jpg

Lohri 2023: बिलासपुर. लोहड़ी का पर्व आज मनाया जाएगा। बिलासपुर के पंजाबी समाज के लोगों में लोहड़ी को लेकर खासा उत्साह है। लोगों ने पर्व की तैयारियां हफ्ते भर पहले ही शुरू कर दी थी। घरों में तरह तरह के व्यंजन बनाये जा रहे हैं जिसे लोहड़ी पर्व के उपरांत घर परिवार के लोगों में बांटा जाएगा।

मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी पर्व के जरिये सूर्य देव व अग्नि देव के प्रति आभार व्यक्त किया जाता हैताकि उनकी कृपा से फसल अच्छी होती रहे और आनी वाली फसलो में भी कोई समस्या न आए। साथ ही यह त्योहार परिवार में आने वाले नए मेहमान जैसे नई बहू, बच्चा या फिर हर साल होने वाली फसल के स्वागत के लिए मनाया जाता है। गीत गाकर बच्चे बड़ों से आशीर्वाद और गिफ्ट्स मांगते है।

आपस में देते हैं बधाइयां-शुभकामनाएं
यह त्योहार प्रकृति में होने वाले परिवर्तन को सेलिब्रेट करने के लिए भी मनाया जाता है। गर्मी के मौसम का आगाज होता है। इस पर्व का एक यह भी महत्त्व है कि बड़े-बुजुर्गों के साथ उत्सव मनाते हुए नई पीढ़ी के बच्चे अपनी पुरानी मान्यताओं एवं रीति-रिवाजों का ज्ञान प्राप्त करते हैं, ताकि भविष्य में भी पीढ़ी दर पीढ़ी उत्सव चलता रहे। लोहड़ी को नई फसल की कटाई और सर्दी के समापन का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन से सर्दी कम होने लगती है। वातावरण का तापमान बढ़ने लगता है। इस दिन लोग एक दूसरे को बधाइयां एवं शुभकामनाएं देते हैं।

बच्चों का उत्सव
बताया जाता है कि जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है। घर में नव वधू या बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है। इस दिन बड़े प्रेम से बहन और बेटियों को घर बुलाया जाता है।

पंजाबी फॅमिली से होने के चलते हम बचपन से लोहड़ी मानते आ रहे हैं। और लोहड़ी पंजाबियों के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। हम इस दिन को हर्षोल्लास के साथ सह परिवार मिलकर मानते हैं। इस पर्व का बेटियों से खासा नाता है। बेटी जब बहु बन अपने ससुराल जाती है तब उनके ससुराल वालों द्वारा अपनी बहु के स्वागत के रूप में भी यह पर्व मनाया जाता है। पर्व के दौरान आग में तिल, रेवड़ी, व अन्य अनाज डालकर समाज, देश और विश्व की खुशहाली की कामना की जाती है।
नमिता ऋषि, प्रदेश अध्यक्षा, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ