
भाग्यशाली है सुर्खाब पक्षी, झलक भर से मिल जाएगी आलौकिक शक्ति
रायपुर. आपने अक्सर ये कहावत सुनी होगी कि तुझमें कौन से सुर्खाब के पर लगे हैं क्या, लेकिन क्या आपको इसका मतलब पता है। सुर्खाब एक ऐसा पक्षी होता है। जो बहुत सुंदर होता है। जितनी सुंदर इस पक्षी की काया होती है उसे देखने वाला भी उतना ही भाग्यशाली होता है। इस नायाब पक्षी का अध्यात्मिक महत्व भी कम नहीं है। सुर्खाब पक्षी की एक झलक आपके जीवन में कई बड़े चमत्कार कर सकती है।
बना देता है रंक को राजा
सुर्खाब पक्षी को कुबेर का आशीर्वाद प्राप्त है जो इसके साक्षात दर्शन करता है उसके घर में कभी कंगाली नहीं आती है। सुर्खाब के पंख जिस घर में रखे जाते हैं रखने से घर में धन, धान्य और सुख समृद्धि की वर्षा होती है। घर से दरिद्रता हमेशा के लिए घर से दूर हो जाती है। अगर आपका व्यवसाय ठीक नहीं चल रहा हो तो भी इसके पंख आपको रातों रात करोड़पति बना सकत हैं। अपनी दुकान या प्रतिष्ठान की तिजोरी के नीचे इसके पंख रखने से माता लक्ष्मी का वहां वास हो जाता है।
पति पत्नि के बीच बढ़ाता है प्रेम
सुर्खाब की खास आदत है कि ये प्राय: जोड़ा बनाकर रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि सुर्खाब जीवन में केवल एक बार ही जोड़ा बनाते हैं। अगर दोनों में से किसी एक कि मृत्यु हो जाए तो दूसरा अकेला ही जीवन व्यतीत करते हैं। वैवाहित जोड़ा सुर्खाब की फोटो अपने बेडरूम में जरूर रखें ऐसा करने से पति पत्नि के बीच चल रही तकरार खत्म हो जाएगी। अगर बात तलाक तक आ गई है तो अचानक पति पत्नि का ह्रदय परिवर्तित हो जाएगा और वे सारे गिले शिकवे भूलकर दोबारा एकदूजे का हाथ थाम लेंगे। यही प्रेमी जोड़ा विवाह करना चाहता है तो भी सुर्खाब की तस्वीर को एसे स्थान पर जरूर लगाएं जहां सुबह उठते ही उनकी पहली नजर इस तस्वीर पर पड़े।
शत्रुओं का करता है नाश
अध्यात्म के जानकारों के अनुसार सुर्खाब के नाखून अगर आपको मिल जाए तो उसे ताबीज बनाकर अपने गले में लाल धागे से बांध लें। ऐसा करने से आपकी कुडली के गृहदोष अपने आप खत्म हो जाते हैं। सुर्खाब के नाखून में दिव्य अलौकिक शक्ति होती है जिसे धारण करने के बाद आपके शत्रुओं का नाश होने लगता है। इस तरह आप शत्रु पर विजय पाकर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। कोर्ट कचहरी में चल रहे मामलों में भी यह काफी चमत्कारिक असर दिखाता है।
ऐसा होता है स्वरूप
सुदंरता में मोर को भी मात देते इस पक्षी को हिमालयन मोनल भी कहा जाता है। इन पक्षियों को कोमोनल कहते हैं जो हिमालय की तराई में पाया जाता है। सुर्खाब को ब्राह्नी डक, रेड शैल डक और चकवा-चकवी भी कहा जाता है। ये मुर्गा प्रजाति के पक्षी हैं। इनका रंग सुनहरा होता है और अंदर की ओर से इसके पंख हरे व चमकदार होते हैं। सुर्खाब प्रवासी पक्षी हैं, ये मूलत: लद्दाख, एवं तिब्बत से आते हैं। भारत में इनका प्रवास अक्टूबर माह से मार्च तक माना जाता है। ये अक्टूबर माह में आते हैं और फरवरी माह के बाद स्वदेश लौट जाते हैं।
Published on:
22 Apr 2020 08:16 pm
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