कोरोनाकाल में खुशखबर: लग्जरी बसें दूसरे राज्यों में बिना परमिट आवाजाही कर सकेंगी

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों से दावा-आपत्ति मांगी, प्रदेश ने भेजी

By: VIKAS MISHRA

Published: 25 Aug 2020, 01:46 AM IST

रायपुर . प्रदेश के बस संचालकों के लिए खुशखबर है। अब लग्जरी बसें बगैर रोकटोक के अन्य राज्यों में आ-जा सकेंगी। आरटीओ बिना परमिट के चलने वाली लग्जरी बसों पर कार्रवाई नहीं करेगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने देशभर के परिवहन कार्यालयों में नोटिफिकेशन जारी कर दावा-आपत्ति मंगाई थी। प्रदेश के परिवहन विभाग ने जवाब भेज दिया है। परिवहन विभाग का कहना है कि लग्जरी बसों को परमिट की जरूरत नहीं होने की व्यवस्था देशभर में लागू हो जाएगी। हालांकि, इसकी प्रक्रिया कुछ माह पहले शुरू हुई थी, लेकिन कोरोनाकाल में बसों का आवागमन बंद होने के कारण मामला अभी लंबित है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति सामान्य हो रही है, जल्द ही इस संबंध में आदेश आ सकता है।
1 हजार लग्जरी बसें संचालित
प्रदेश में कुल 12 हजार बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से करीब एक हजार बस लग्जरी की श्रेणी में हैं। वर्तमान में प्रदेश के पांच संभागों के आरटीओ कार्यालय से बसों को परमिट जारी होता है। नए आदेश के मुताबिक अब प्रदेशभर में एक ही जगह से बसों का परमिट जारी होगा। प्रदेश में इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया गया है। यदि केंद्र सरकार का यह नियम लागू हो गया तो बस संचालक नॉन एसी बस की जगह पर एसी बस लेने लगेंगे, जिसमें उनको परमिट की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
नियम लागू हुआ तो यह आएगी दिक्कत
परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि यदि लग्जरी बसों को परमिट लेने से मुक्तकिया गया तो सारा सिस्टम आउट आफ कंट्रोल हो जाएगा। बस संचालकों का रास्ते में विवाद होता है। टैक्स का निर्धारण कैसे किया जाएगा, यह भी नोटिफिकेशन में तय नहीं है। इसके साथ ही बसें कहां रुक रही हैं, कहां चल रही हैं, प्रदेश के किस रूट पर कौन सी बस कितने किलोमीटर चल रही है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाएगी।
अभी यह है स्थिति
वर्तमान में बसों के परमिट जारी होने पर सबसे पहले उनका समय के साथ रूट का निर्धारण किया जाता है। उसके बाद किलोमीटर और सीटिंग के हिसाब से स्लैब बना है। उस हिसाब से टैक्स वसूल किया जाता है।

केंद्र सरकार ने लग्जरी बसों को परमिट फ्री करने का नोटिफिकेशन जारी कर उस संबंध में दावा-आपत्ति मांगी थी। इस संबंध में परीक्षण किया जा रहा है, उसके बाद जबाब दिया जाएगा।
शैलाभ साहू, आरटीओ, रायपुर

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