
रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार में गिरावट और स्वस्थ होने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या का ही नतीजा है कि आज रिकवरी रेट ८६.८ प्रतिशत जा पहुंचा है। मगर, संक्रमण नित नई चुनौतियां लेकर आ रहा है। अब ऐसे प्रकरण बढ़ रहे हैं जो एंटीजन और ट्रूनेट टेस्ट में निगेटिव थे मगर वे आरटी-पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव आ रहे हैं। वीआईपी लोगों की जांच में यह सामने आया है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने यह साफ कर दिया है कि अगर लक्षण हैं कि लक्षण हैं और एंटीजन या फिर ट्रूनेट से रिपोर्ट निगेटिव आ रही है तो तत्काल आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाएं।
सूत्रों के मुताबिक बीते दिनों एक-दो नहीं बल्कि १२ से अधिक वीआईपी (नेता, अधिकारी) ने एंटीजन और ट्रूनेट के बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया जो पॉजिटिव निकला और फिर हड़कंप मच गया। तत्काल उन्हें होम आईसोलेशन और जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने की आवश्यकता थी किया गया। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अभी इन प्रकरणों पर कोई अध्ययन नहीं हुआ है। मगर, बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं।
कोई भी टेस्ट १०० प्रतिशत सही नतीजे नहीं देता-
एंटीजन टेस्ट- ६६-७० प्रतिशत
ट्रूनेट टेस्ट- ५०-६० प्रतिशत
आरटी-पीसीआर टेस्ट- ९२-९६ प्रतिशत
(नोट- ये टेस्ट की एक्यूरेसी (सत्यता) को प्रदर्शित करता है।)
सुझाव- अगर आपको सर्दी, जुकाम, बुखार है तो तत्काल एंटीजन टेस्ट करवाएं। एंटीजन में पॉजिटिव है तो इसे पॉजिटिव ही मानिए और विभाग मान रहा है। अगर रिपोर्ट निगेटिव है तो आरटी-पीसीआर सैंपल देकर खुद को रिपोर्ट आने तक आईसोलेट कर लें। इससे आपसे दूसरों को संक्रमण फैलने की संभावना खत्म हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर, इसे गंभीरता से नहीं लिया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
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टेस्ट के प्रकार-
आरटी-पीसीआर टेस्ट-
रियल टाइम पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) टेस्ट आज के समय में कोरोना टेस्ट का सबसे भरोसेमंद टेस्ट है। जिसके ९२-९५ प्रतिशत तक नतीजे सही होते हैं। पॉलीमर वे एंजाइम होते हैं जो डीएनए की नकल बनाते हैं। संक्रमित के स्वैब सैंपल से डीएनए की नकल तैयार कर संक्रमण की जांच की जाती है। इसकी जांच के लिए अत्याधुनिक लैब और कम से कम ४-६ घंटे का समय चाहिए होता है।
एंटीजन टेस्ट- नाक से लिए सैंपल को लिक्विड में डाल टेस्ट किट में डाला जाता है। १०-१५ मिनट में व्यक्ति के संक्रमित होने या न होने की पुष्टि हो जाती है।
ट्रूनेट मशीन से जांच- यह भी एक स्वैब टेस्ट ही है लेकिन एक बार में ६-८ की ही जांच होती है। इसका नतीजे आने में ४० मिनट लग जाते हैं।
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अस्पताल में काफी मरीज आए, जिनमें लक्षण थे और उनका सीटी स्कैन करवाया तो टिपिक कोविड१९ के लक्षण थे। जबकि उनकी एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव थी। वर्तमान में मरीजों के इलाज में काफी सावधानी व गंभीरता की जरुरत है। इसलिए गंभीर केस में सीटी स्कैन करवा ही रहे हैं।
डॉ. आरके पंडा, विभागाध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट, डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल
कंफॉर्मेटिव टेस्ट आरटी-पीसीआर को ही माना गया है। अगर, लक्षण हैं तो निश्चित तौर पर आरटी-पीसीआर ही करवाना चाहिए। इसमें रिस्क लेने की जरुरत नहीं है।
डॉ. सुभाष पांडेय, प्रवक्ता एवं संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य विभाग
Published on:
01 Nov 2020 04:31 pm
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