
क्लैट क्लियर कर बनाएं लॉ में कॅरियर, नेम एंड फेम के साथ मिलेगा अच्छा पैकेज
रायपुर. लॉ के कोर्स का आज इतना विस्तार हो चुका है कि इसके लिए मेडिकल इंजीनियरिंग की तरह ऑल इंडिया लेवल पर एग्जाम होने लगे हैं। यह एग्जाम अभी उन बच्चों के लिए हेते हैं जो 12वीं के बाद 5 वर्षीय एलएलबी का कोर्स करना चाहते हैं। यहां बच्चों को पांच साल में इतना प्रोफेशनल कर दिया जाता है कि उसे दूसरी जगह नौकरी तलाशने की जरूरत नहीं पड़ती। उसका कैंपस सेलेक्शन ही अच्छे नंबर से हो जाता है।
हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स बॉडी के प्रेसीडेंट एकांश जैन ने बताया, एलएलबी का कोर्स करने के लिए बच्चों के पास दो ऑप्शन होते हैं। पहला वह या तो 5 वर्षीय पाठ्यक्रम वाला कोर्स करे। इसके लिए उसे 12वीं पास करने के बाद क्लैट (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) देना होगा, जिसमें रैंकिंग के आधार पर उसका सेलेक्शन देश की 22 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में होता है। दूसरा वह ग्रेजुएशन कर ले और उसके बाद किसी यूनिवर्सिटी या लॉ कॉलेज से एलएलबी का कोर्स कर ले। यह तीन साल का कोर्स होता है।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एक्सपोजर है अधिक
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए पूरे देशभर से काफी संख्या में बच्चे क्लैट का एग्जाम देते हैं। हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ युनिवर्सिटी रायपुर देश में 6वें नंबर की यूनिवर्सिटी है। यहां ऑल ओवर इंडिया बच्चे पढऩे आते हैं। यहां से डिग्री लेने वाले बच्चों को बाहर काफी अच्छा एक्सपोजर मिलता है।
18-20 लाख तक के मिल रहे पैकेज
इस यूनिवर्सिटी में चौथे साल से ही नौकरी के ऑफर आने लगते हैं। यहां के बच्चों की इतनी डिमांड है कि नौकरी की लाइन लगी है, लेकिन बच्चे कम पड़ जा रहे हैं। यहां से 20 लाख के पैकेज तक की नौकरी बच्चों को मिली है। पिछले साल हुए कैंपस सेलेक्शन की ही बात करें तो यहां से भानु प्रकाश जोशी, रुपाली मिश्रा, रीति चटोपाद्याय, अनिरुद्ध अग्रवाल एजेडबी (इंडिया की बड़ी पार्टनर लॉ फर्म) और संकल्प सिंह, हर्ष बजोरिया का आईसीआईसीआई जैसी बड़ी जगह सेलेक्शन हुआ है। एलएलबी का कोर्स करने के बाद बच्चे सिविल जज का एग्जाम देकर जज की नौकरी कर सकते हैं। इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया से रजिस्टर्ड होकर लॉ की प्रैक्टिस कर सकते हैं।
जज बनना है वकील, छात्रों की चॉइस
पांच साल का एलएलबी कोर्स करने के दौरान नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी साल में एक बार तीन महीने का प्रैक्टिकल कोर्स कराती है। इस तरह पांच साल में स्टूडेंट्स को 15 महीने का प्रैक्टिकल करने का मौका मिलता है। इस दौरान उसे हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट के बड़े वकीलों के साथ काम करने का मौका दिया जाता है। यहां तक की कॉर्पोरेट फर्म और जजेज के अंदर भी प्रैक्टिस करने का मौका मिलता है। इससे स्टूडेंट यह डिसाइड कर पाता है कि उसे आगे चलकर वकालत करना है या फिर जज के रूप में काम करना है।
इस यूनिवर्सिटी में 180 सीट्स हैं। 160 छत्तीसगढ़ और ऑल इंडिया के लिए। 16 एनआईआर और 4 विदेशी छात्रों के लिए। जब विदेशी छात्र नहीं होते तब की स्थिति में अन्य को सीट अलॉट की जाती हैं। अभी एनआईआर छात्रों ने दाखिला लिया है। यह यूनिवर्सिटी 2003 में ओपन हुई जिसका उद्धाटन तत्कालीन सीएम अजीत जोगी ने किया था। पहला बैच 2008 में पासआउट हुआ।
दीपक श्रीवास्तव, कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन, एचएलएनयू
Published on:
10 Jun 2020 07:12 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
