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47 लाख के इनामी माओवादी लीडर पहाड़सिंह ने किया सरेंडर, 3 राज्यों की पुलिस को थी तलाश

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, महाराष्ट्र और मध्य प्रेदश की सीमा में लाल आतंक का पर्याय बन चुके इनामी माओवादी लीडर पहाड़सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।
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रायपुर

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Deepak Sahu

•

Updated: 23 Aug 2018, 8:51 PM IST

maoist leader surrender

47 लाख के इनामी माओवादी लीडर पहाड़सिंह ने किया सरेंडर, 3 राज्यों की पुलिस को थी तलाश

रायपुर/भिलाई. तीन गनमैन की सुरक्षा में रहकर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, महाराष्ट्र और मध्य प्रेदश की सीमा में लाल आतंक का पर्याय बन चुके इनामी माओवादी लीडर पहाड़सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया। ये समर्पण आज दुर्ग रेंज के आइजी जीपी सिंह के समक्ष किया गया। माओवादी लीडर पहाड़ सिंह उर्फ कुमार साय उर्फ राम मोहन सिंह टोप्पो के उपर कुल 47 लाख रुपए का इनाम था। तीनों राज्यों की पुलिस ने उस पर इनाम घोषित कर रखा था।

आइजी सिंह ने प्रेस कॉन्फे्रंस में बताया कि पहाड़सिंह ने कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था। वह माओवादी जीआरबी डिवीजन का सचिव था। लंबे समय से पुलिस को उसकी तलाश थी। हर बार सर्च ऑपरेशन के दौरान वह पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों को चकमा देकर भागने में सफ ल हो जाता था। आइजी ने बताया कि पहाड़सिंह महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव रहा है। हथियार के बिना समर्पण इसलिए किया कि इसके 3 गनमैन सुरक्षा में 24 घंटे सतर्क रहते थे।

आइजी ने कहा कि इसका समर्पण पुलिस की बड़ी सफ लता और माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है। इससे न केवल माओवादियों की कमर टूटेगी बल्कि चुनाव के दौरान उनके आभियानों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। पहाड़सिंह ने पत्रिका को बताया कि वह 12 वीं पास है। बीएससी प्रथम सत्र में ही फेल हो गया था। पहाड़ सिंह राजनांदगांव के ग्राम फाफामार का रहने वाला है। वहीं 12 वीं साइंस सब्जेक्ट से पढ़ाई की। झांसे में आकर माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उन्होंने कहा कि माओवादी लीडरों का असलियत वह समझ चुका है। वे यहां के युवाओं से वारदात करवाते हैं।

आइजी ने बताया कि पहाड़सिंह वर्ष 1999 में अपने रिश्तेदार जगत कुंजाम से मिलने ग्राम खेडेपार गया था। उसी दौरान उसकी मुलाकात देवरी दलम के माओवादी कमांडर देवचंद उर्फ चंदू उर्फ नरेश से भामरागढ़ क्षेत्र गोंदिया में हुई। जहां आदिवासी अस्मिता को बचाने के लिए आदिवासी युवाओं को संगठन में जोडऩे की बात हुई। उन्होंने कहा कि पहाड़सिंह के मुख्यधारा में लौटने से माओवादी एमएमसी (मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) को बड़ा झटका लगा है। पहाड़सिंह एक अच्छा वक्ता भी है। लोगों की बैठकें लेकर उन्हें अपने संगंठन में जोडऩे में माहिर है। इसका फायदा माओवादी संगठन उठा रहे थे।