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शादी का सीजन खत्म…अब चलेगी रिश्ते की बात, मांगलिक-नाड़ी दोष नहीं, गुण व योग्यता देखें

पत्रिका से बातचीत में सामाजिक प्रतिनिधियों ने खुलकर रखे विचार

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शादी का सीजन खत्म...अब चलेगी रिश्ते की बात, मांगलिक-नाड़ी दोष नहीं, गुण व योग्यता देखें

शादी का सीजन खत्म...अब चलेगी रिश्ते की बात, मांगलिक-नाड़ी दोष नहीं, गुण व योग्यता देखें

गौरव शर्मा @ रायपुर. श्रीहरि 4 महीने की योग निद्रा में चले गए हैं। इस बीच शादी-ब्याह प्रतिबंधित रहेंगे। रिश्तों की तलाश जरूर तेज हो जाएगी। ग्रह-नक्षत्रों की बाधा कई बार बाधा बन जाती है। यानी रिश्ता इसलिए तय नहीं हो पाता, क्योंकि कुंडली में मंगल या नाड़ी का दोष है। लड़का-लड़की की योग्यता का महत्व नहीं रह जाता। 'पत्रिकाÓ ने जब इस विषय पर सामाजिक प्रतिनिधियों से चर्चा की तो उन्होंने माना, यह बड़ी समस्या है। सभी ने एकमत होकर कहा कि केवल ग्रहों की दशा किसी का भविष्य तय नहीं करती। व्यक्ति के अपने गुण-दोष इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। इसी से उनके जीवन की दिशा तय होती है। प्रतिनिधियों ने अपील करते हुए यह भी कहा कि व्यवहारिक ²ष्टिकोण अपनाते हुए योग्यता पर ध्यान दें। बेहतर जीवनसाथी का चुनाव इससे आसान होगा और क्या कहा सामाजिक प्रतिनिधियों ने। आइए जानते हैं...

ब्राह्मण समाज: ग्रहों के फेर में उम्रदराज हो रहे हैं युवक-युवतियां

का न्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अरुण शुक्ला ने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों के फेर में कई युवाओं का रिश्ता तय नहीं हो पाता। आमतौर पर देखा जाता है कि जिनकी कुंडली में मांगलिक या नाड़ी दोष है, उनकी शादी बहुत देर से होती है। कई बार तो शादी ही नहीं लग पाती। इन मान्यताओं की जड़ें इतनी गहरी हैं कि पढ़े-लिखे लोग भी इसे मानते हैं। बदलते वक्त के साथ नई सोच को अपनाना होगा। लोग ऐसी बातों पर विश्वास कर योग्य रिश्तों को न ठुकराएं, इस दिशा में समाज भी प्रयास कर रहा है। इसी विषय पर संगोष्ठियां भी करवाई गईं जिनमें खुद धर्म के विद्वानों ने एकमत होकर कहा है, मंगल जैसा कोई दोष नहीं होता।

अग्रवाल समाज: आस्था का सम्मान है पर अज्ञानता का विरोध भी

छ त्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने कहा कि सनातन धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु के बीच 16 संस्कार की व्यवस्था है। विवाह भी इनमें से एक है। शास्त्रों में मंगल और नाड़ी दोष से इसमें समस्या होने की बात कही गई है तो कहीं न कहीं उसका समाधान भी बताया गया है। केवल मांगलिक होने की वजह से शादी टाल देना अज्ञानता से ज्यादा कुछ नहीं। इसका हम विरोध करते हैं। आस्था का सम्मान करते हुए यही कहना चाहूंगा कि ऐसी बातों को लेकर कोई शंका हो तो एक बार धर्म के किसी बड़े जानकार से चर्चा जरूर करें। ग्रह-दोष के चलते बेहतर जीवनसाथी को ठुकराने से अच्छा है कि इसके निदान पर ध्यान दें।

कायस्थ समाज: कुंडली देखकर की शादी स्थायी होगी, गारंटी कहां?

बदलते वक्त के साथ प्राथमिकताएं भी बदल रहीं हैं। भाग्य अलग विषय है और योग्यता अलग। पुरानी आस्था और परंपराओं को छिन्न-भिन्न न करें, लेकिन व्यवहारिक सोच तो अपना ही सकते हैं। ऐसे कई लोग हैं जिनकी शादी से पहले कुंडलियां मिलाई गईं। 32 गुण मिलने के बाद भी शादी चल नहीं सकी। तलाक हो गया। ऐसे भी कई मामले हैं जहां बिना कुंडलियां मिलाए लोग सुखद दांपत्य जीवन बिता रहे हैं। इसकी क्या गारंटी है कि कुंडली देखकर की गई शादी स्थायी और सुखमय रहेगी। दरअसल, ज्योतिषीय क्षेत्र का व्यवसायीकरण होने की वजह से ये सारी समस्याएं सामने आ रहीं हैं। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।

कुर्मी समाज: लड़कियों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है

मनवा कुर्मी समाज के प्रदेश अध्यक्ष चोवाराम वर्मा ने कहा कि कुंडली में मंगल या नाड़ी दोष होने से सबसे ज्यादा परेशानी लड़कियों को हो रही है। समाज के लोग कई बार ऐसी समस्याएं लेकर सामने आते हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि योग्य होने के बावजूद शादी नहीं लग पाने की वजह से कई युवा डिप्रेशन में चले जाते हैं। स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है कि हम ऐसी मान्यताओं में न उलझें। लड़का-लड़की को उनके आदत व्यवहार से परखें। घर के सदस्यों के व्यवहार को समझें। इन सबको देखते हुए शादी का निर्णय लें। किसी की कुंडली अच्छी है, इसका ये मतलब तो नहीं कि वह व्यक्ति भी अच्छा ही होगा।