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एेसे ही खुले में फेंका जा रहा मेडिकल वेस्ट, बन रहा लोगों की मुसीबत का सबब

मेडिकल कचरा बना शहर के लिए खतरा, पर्यावरण विभाग को नहीं मिला नई दरों का प्रस्ताव

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एेसे ही खुले में फेंका जा रहा मेडिकल वेस्ट, बन रहा लोगों की मुसीबत का सबब

रायपुर. राजधानी में मेडिकल वेस्ट मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। निगम के कचरा डंपिंग जोन में भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट देखने को मिल रहे हैं। इन कचरों को खाकर मवेशी लगातार मरते जा रहे हैं। जिससे यह आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।

पत्रिका की टीम को दलदल सिवनी में कुछ इसी तरह के हालात मिले। वहां के निवासी व हिंदु परिषद के सदस्य ओमेश बिसेन ने बताया कि इसके प्रभाव से प्रतिदिन 2 से 3गाय, बैल व अन्य जानवर मर रहे हैं, जो आंकड़ा 20 को पार कर चुका है। वहीं पर्यावरण विभाग की ओर से महज कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है। आलम यह है कि रायपुर सहित दुर्ग संभाग के लिए मेडिकल वेस्ट निष्पादन की नई कंपनी को निविदा देने के दो माह बाद भी सैकड़ों क्लीनिक और हॉस्पिटल कंपनी को वेस्ट नहीं दे रहे हैं। एेसे में पर्यावरण सचिव संजय शुक्ला के निर्देशों के बाद अधिकारियों ने दिखावे के लिए कुछ संस्थानों का भ्रमण कर उचित व्यवस्था के अभाव में कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया है, जिनमें गिनती के नाम शामिल हैं।

पांच दिनों में नहीं पहुंच सकी फाइल: मई के पहले सप्ताह में नई निविदा जारी होने के बाद कंपनी की ओर से प्रस्तावित दरों पर आइएमए की आपत्ति पर पर्यावरण विभाग ने मई के अंत में दोनों पक्षों के बीच एकमत बनाने का प्रयास किया था, जबकि इसमें सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद पर्यावरण की ओर से स्वास्थ्य संचालक को पत्र लिखकर दरों की अनुशंसा करने कहा था। जिसके बाद स्वास्थ्य संचालक की मध्यस्थता में 4 जुलाई को बैठक के बाद बीच का रास्ता निकाला था। जिसके 5 दिनों बाद भी पर्यावरण विभाग को अनुशंसित दरें नहीं मिल पाई हैं।

नई निविदा की शर्तों के अनुरूप कंपनी को राजधानी से 75 किमी के दायरे में कार्य का जिम्मा सौंपा है। कंपनी के मुताबिक इसमें आने वाले लगभग 1600 संस्थानों में से महज ५६१ संस्थान ही सेवा ले रहे हैं। पत्रिका के जनहित से जुड़े इस अभियान पर चर्चा के दौरान पर्यावरण सचिव ने इन डिफाल्टर संस्थानों पर कार्रवाई करने की बात कही थी। जिसके एवज में अनुविभागीय अधिकारियों की आेर से गिनती के अस्पतालों का ही निरीक्षण किया और कमियां पाए जाने पर क्षेत्रीय अधिकारियों को कार्रवाई के लिए आदेश दिया है।

राजनांदगांव 8

पर्यावरण संरक्षण मंडल के मेडिकल वेस्ट प्रभारी बीएस ठाकुर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अनुशंसित दरों की फाइल अबतक हमें प्राप्त नहीं हो पाई है। टीम की ओर से कुछ संस्थानों का निरीक्षण किया गया है, जिनमें कमियां पाए जाने पर कबीर नगर क्षेत्रीय अधिकारी को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।