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मेकाहारा के डॉक्टर ने कहा – यहाँ नहीं हो पायेगा इलाज, प्राइवेट अस्पताल ले जाओ, फिर बिक गये गहने…

इलाज के लिये छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल मेकाहारा ने भी जगह नहीं दी...

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मेकाहारा के डॉक्टर ने कहा - यहाँ नहीं हो पायेगा इलाज, प्राइवेट अस्पताल ले जाओ, फिर बिक गये गहने...

दिनेश यदु @ रायपुर . छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रहे सड़क निर्माण में ठेकेदार की लापरवाही के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। जिसका खामियाजा 26 मई की रात एक राहगीर को भुगतना पड़ा. जिसके इलाज के लिये छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल मेकाहारा ने भी जगह नहीं दी, न ही कोई जनप्रतिनिधि और न ही ठेकेदार. सभी जगह उसे ठेंगा ही मिला.

जी, हम बात कर रहें हैं एक माह पूर्व 26 मई दिन मंगलवार की. घटना दोपहर की है जहाँ विराज मंडल नाम का राहगीर 18 ब्लॉक से निकलकर बाल सप्रेक्षण गृह के रास्ते से सायकल से घर जाने के लिए निकला था ।

टक्कर इतना जोरदार था कि विराज सडक निर्माण में लगे रोड रोलर के नीचे आ गया। जिससे वह मौके पर ही बेहोस हो गया। स्थानीय लोगो की मदद से आनन-फानन में पास के अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर ने शरीर के अंदर चोट होने की बात कहकर छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा रेफर कर दिया. लेकिन मेकाहारा के डॉक्टरों ने उसे यहाँ(मेकाहारा) में इलाज नहीं हो पाने की बात कह कर एक निजी अस्पताल का पता दे दिया.

स्मार्ट कार्ड और संजीवनी कोष की मदद का दिया लालच, लेकिन बिक गये गहने

सड़क हादसे में घायल विराज मंडल की दादी रत्ना मंडल ने बताया कि जब हम विराज को मेकाहारा ले गए. लेकिन डॉक्टर ने कहा कि इसकी स्थिति बहुत गंभीर है यहाँ इलाज नही हो सकता, इसे शंकर नगर के एक निजी हॉस्पीटल में ले जाओ और साथ में डॉक्टर आश्वसन भी दिया कि स्मार्ट कार्ड से बच्चे का इलाज हो जाएगा और संजीवनी राहत कोष से भी आपको मद्द मिल जाएगा।

इतर मरीज की दादी रत्ना के अनुसार निजी अस्पताल में ऐसा कुछ नही हुआ, डॉक्टरो ने स्मार्ट कार्ड में पैसा खत्म होने की बात कही और उन्हें अतिरिक्त पैसा जमा करने के लिए कहा.

चूँकि विराज के पिता ऑटो चालक है. उनके पास इलाज के लिए इतना पैसा नहीं है इसलिये उसे घर वापस ले आये, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से गहने बेचकर और साथ ही कर्ज लेकर एक निजी अस्पताल में एडमिट कराये. जिसके बाद भी कोई फायेदा नहीं हुआ. फिलहाल विराज की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर परिजन

विराज के इलाज के लिया उसके परिजन दर दर भटक रहें है . विराज की दादी ने बताया - माना नगर पंचायत अध्यक्ष श्यामा चक्रवती और सड़क निर्माण कर रहे ठेकेदार के पास अपनी समस्या को लेकर गए थे । जहाँ नगर पंचायत अध्यक्ष ने संजीवनी में आवेदन देने की बात कही। विराज की दादी ने बताया कि अभी तक संजीवनी का कोई लाभ नहीं मिला है और न ही ठेकेदार ने किसी प्रकार की मदद की है।

एक पुलिस कर्मी की भी जा चुकी है जान

ठेकेदार की लापरवाही के कारण 28 जून की रात एक पुलिसकर्मी की भी जान चली गई। पुलिस विभाग में चौथी बटालियन में पदस्थ नीलेश तिर्की हादसे की रात जवान अपने काम से मोटर साइकल से जा रहा था। उसी दौरान टीपू ढाबा के पास सड़क पर मिट्टी का ढेर, गड्ढे और डिवायडर पर लगे सरिया से टकरा गया. जिससे हाथ और सिर पर गंभीर चोट आई . आसपास के लोगों की मदद से अस्पताल ले जाया गया. जहाँ डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।