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विधानसभा का मानसून सत्र: सरकार का फैसला, अब हर सरकारी दफ्तरों में तैनात होंगे प्राइवेट कंसल्टेंट

सरकार ने सरकारी दफ्तरों में प्राइवेट कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए चार फर्मों से अनुबंध कर रखा है।

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विधानसभा का मानसून सत्र: सरकार का फैसला, अब हर सरकारी दफ्तरों में तैनात होंगे प्राइवेट कंसल्टेंट

रायपुर . छत्तीसगढ़ में जब कभी भी माओवादी हमला होता है तो हमले के बाद दो-चार दिन इस बात पर चर्चा अवश्य चलती है कि ‘किसकी चूक’ के चलते जवान मारे गए? हमारा सूचना तंत्र कमजोर क्यों था? कौन है जिसने गोपनीय सूचनाएं लीक की? आदि-आदि। देश के तमाम सुरक्षा सलाहकार यह मान चुके हैं कि माओवाद से मुकाबला करने के मामले में छत्तीसगढ़ का सूचना तंत्र बेहद कमजोर है।

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इधर, सरकार के एक फैसले ने भी सबको चौकाया है। सरकार ने सरकारी दफ्तरों में प्राइवेट कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए चार फर्मों से अनुबंध कर रखा है। फिलहाल इन कंसलटेंटों की नियुक्ति कृषि और रायपुर कलेक्टर कार्यालय के अलावा माओवाद प्रभावित छत्तीसगढ़ के पुलिस महकमे में भी की गई हैं।

कांग्रेस के विधायक भूपेश बघेल के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया है कि सरकारी दफ्तरों में निजी कंसलटेंट रखने के लिए छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी चिप्स ने मेसर्स वाटर हाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अर्नस्ट एंड यंग एलएलपी, मेसर्स केपीएमजी अडवायजरी सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स डेलायट टच टोहमत्सू इंडिया एलएलपी से अनुबंध कर रखा है। विधायक को दी गई जानकारी में यह बताया गया है कि कंसलटेंटों की तैनाती रायपुर कलक्टर कार्यालय और कृषि विभाग के अलावा पुलिस महकमे में भी की गई है।

बघेल के एक सवाल के जवाब में यह जानकारी भी दी गई है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव सचिवालय के अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रोद्योगिकी विभाग, वित्त विभाग, तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, वन विभाग, आवास एवं पर्यावरण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, समाज कल्याण विभाग, ऊर्जा, वाणिज्य एवं उद्योग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सहित कुल 18 विभागों में मुख्यमंत्री फैलोशिप योजना के 19 फैलोज की तैनाती भी की गई है।

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1- अनुबंध की शर्तों में कई बिंदु शामिल है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह भी है कि कंसलटेंट फर्म विभाग की गोपनीय सूचनाएं अथवा आंतरिक सूचनाओं का मौखिक, लिखित अथवा किसी भी रुप में प्रसारण नहीं करेंगे। इन सूचनाओं आदि में निविदा आदि भी शामिल है। सूचनाओं अथवा जानकारियों के प्रसारण की दशा में एजेंसी पर कार्यवाई की जा सकती है।

2- कंसलटिंग फर्म के साथ विभाग का अनुबंध तीन साल के लिए होगा।

3- कंसलटिंग फर्म को 10 लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करनी होगी।

4- प्रदेश के विभाग सरकार के नीतिगत विकास, संकल्पना, विस्तृत परियोजना, सामग्री क्रय-विक्रय, डिजाइन एवं क्रियान्यवन तथा निगरानी कार्य के लिए इन कंसलटेंटों का चुनाव कर सकते हैं।

5- कार्य अवधि के दौरान चयनित फर्म किसी अन्य कंपनी द्वारा अधिगृहीत कर ली जाती है तो चयनित फर्म के साथ समस्त अनुबंध / शर्त अधिगृहीत करने वाली कंपनी को स्वत: हस्तांतरित हो जाएगी।