
राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद की सदस्य विद्या राजपूत से पत्रिका की बातचीत ( Photo - Patrika )
Transgender Amendment Bill: लोकसभा में थर्ड जेंडर से जुड़ा नया कानून पास होने के बाद इसे ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले समुदाय के प्रतिनिधियों का मानना है कि कानून अभी भी अधूरा है और इसमें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे सबसे जरूरी मुद्दों पर ठोस प्रावधान नहीं हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कानून वास्तव में थर्ड जेंडर समाज की जिंदगी बदलेगा या फिर यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद की सदस्य विद्या राजपूत से बातचीत।
Q. लोकसभा में थर्ड जेंडर से जुड़ा कानून पास हुआ है, इसे आप किस नजर से देखती हैं?
यह कानून ट्रांसजेंडर समुदाय के एक सीमित हिस्से को ही कवर करता नजर आता है। ऐसे में पूरे समुदाय तक योजनाओं और अधिकारों का लाभ पहुंचाना चुनौती रहेगा। व्यापक सुधार की अभी भी जरूरत है।
Q. इस कानून के बाद सबसे बड़ा बदलाव किस क्षेत्र में आएगा?
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में बड़े बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन कानून में इन पर ठोस प्रावधान नजर नहीं आते। इसलिए अभी बड़े बदलाव की उम्मीद कम दिखती है।
Q.रायपुर और छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
सबसे बड़ी समस्या रोजगार की कमी और परिवार व समाज में स्वीकृति का अभाव है। जब तक रोजगार और सामाजिक स्वीकृति नहीं बढ़ेगी, स्थिति में बड़ा सुधार मुश्किल है।
Q. कानून को प्रभावी बनाने के लिए क्या जरूरी है?
मजबूत सिस्टम, स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा, पर्याप्त स्टाफ और लगातार मॉनिटरिंग जरूरी है। सिर्फ कानून बनाने से बदलाव नहीं आता, उसे जमीन पर लागू करना जरूरी होता है।
Q.थर्ड जेंडर युवाओं और परिवारों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और संगठित होकर आवाज उठाएं। जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी, ताकि समुदाय को उसके पूरे अधिकार मिल सकें।
पहले (2019 कानून में): कोई भी व्यक्ति खुद अपनी gender identity तय कर सकता था
अब (2026 में): Self-identification (खुद की पहचान) को हटा दिया गया है।
पहचान के लिए मेडिकल जांच (Medical Board)
अब सीधे “मैं ट्रांसजेंडर हूँ” कहने से पहचान नहीं मिलेगी
इसके लिए: मेडिकल बोर्ड / स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। उसी के आधार पर पहचान तय होगी
पहचान प्रमाण पत्र (ID Certificate) का नया नियम
जिला मजिस्ट्रेट (DM) अब सीधे सर्टिफिकेट नहीं देगा
पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, फिर DM सर्टिफिकेट देगा
कुछ लोगों को बाहर कर दिया गया
कई “gender identities” अब इस कानून में शामिल नहीं होंगी
जैसे:gender-fluid, non-binary, self-identified trans व्यक्ति
यानी दायरा छोटा कर दिया गया है
सख्त सजा के नए नियम
नए बिल में कुछ मामलों में सजा बढ़ाई गई है:
अगर कोई:जबरदस्ती किसी को ट्रांसजेंडर बनाता है, शोषण करता है या मजबूर करता है
सजा: 5 से 10 साल तक जेल (कुछ मामलों में)
सरकार का तर्क (क्यों बदला कानून?)
सरकार कहती है: पुरानी परिभाषा बहुत “विस्तृत” थी
इसका गलत फायदा उठाया जा रहा था
नई परिभाषा से: असली लाभार्थियों तक योजनाएं पहुंचेंगी।
Updated on:
28 Mar 2026 05:16 pm
Published on:
28 Mar 2026 05:15 pm
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