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Raksha Bandhan: इस बार रक्षाबंधन पर नक्सल मुक्त बस्तर की प्राकृतिक राखियों की रहेगी धूम

स्व-सहायता समूह की दीदियों को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण, सीएम विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण और स्वरोजगार को मिल रही नई गति
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रायपुर

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Anupam Rajiv Rajvaidya

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Updated: 30 Jul 2026, 3:08 AM IST

Raksha Bandhan

भाई बहन के पावन पर्व रक्षाबंधन पर इस बार नक्सल मुक्त बस्तर (Naxal Free Bastar) के स्वसहायता समूह की दीदियों द्वारा बनाई गई राखियों की धूम रहेगी। प्राकृतिक सामग्री से तैयार की जा रही ये राखियां पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं।

स्थानीय संसाधनों के उपयोग से तैयार इन उत्पादों के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक कला, स्थानीय शिल्प और ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता को नई पहचान मिल रही है। यह पहल वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local) की भावना को भी सशक्त कर रही है l

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण (Economic Empowerment) और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बस्तर जिले के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) आड़ावाल, जगदलपुर द्वारा रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) पर्व को ध्यान में रखते हुए स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल से महिलाओं को कौशल विकास के साथ-साथ त्योहारी सीजन (Festive Season) में अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी मिल रहा है।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में 21 से 26 जुलाई तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सातों जनपदों से आई स्वसहायता समूह की 30 दीदियों (Self Help Group Didi) ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आकर्षक, हस्तनिर्मित और पर्यावरण अनुकूल राखियां बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

स्थानीय संसाधनों से आकर्षक राखियां तैयार हो रही हैं। महिलाओं ने धान (Dhan), चावल, लालभाजी के बीज, खीरा के बीज, मयूर पंख, बांस तथा अन्य प्राकृतिक एवं सजावटी सामग्रियों से सुंदर और कलात्मक राखियां (Rakhi) बनाना सीखा। प्रशिक्षकों ने उन्हें डिजाइन चयन, रंग संयोजन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग तथा बाजार (Market) की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की बारीकियों की भी जानकारी दी।

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद सभी प्रतिभागी अपने-अपने जनपदों में लौटकर स्व-सहायता समूह (SHG) की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर राखियों का निर्माण करेंगी। इससे स्थानीय बाजार में हस्तनिर्मित एवं प्राकृतिक राखियों की उपलब्धता बढ़ेगी और समूह की महिलाओं को रक्षाबंधन के अवसर पर अतिरिक्त आय (Additional Income) अर्जित करने का अवसर मिलेगा।