
Navratri 2021: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी, जानिए पूजा विधि, मंत्र, भोग और कथा
रायपुर. Navratri 2021: नवरात्रि का दूसरा दिन शुक्रवार 8 अक्टूबर को है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां भगवती दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) की आराधना की जाती है। ब्रम्ह का अर्थ होता है तपस्या, चारिणी का अर्थ होता है आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता तप का आचरण करने वाली। जो भी भक्त मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आराधना करते हैं तो उनके जीवन में तप, त्याग, संयम और सदाचार की वृद्धि होती है। मां भगवती दुर्गा के आशीर्वाद से जीवन के कठिन समय में भी भक्तों का मन अपने भी कर्तव्यों से विचलित नहीं होता है। एकाग्रता और संयम से जीवन के कठिन से कठिन समय से भी बाहर निकल जाते हैं। क्योंकि मां हमें संयम, एकाग्रता और सदाचार का वरदान प्राप्त होता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या के रूप में होता है इनके एक हाथ में अष्टदल की माला है और दूसरे हाथ में कमंडल है ये अक्षय माला और कमंडल धारिणी मां ब्रह्मचारिणी नामक दुर्गा शास्त्रों के ज्ञान और तंत्र-मंत्र से संयुक्त है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को सर्वत्र विद्या देकर विजयी बनाती हैं। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही साधारण है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वभाव बहुत ही सौम्य और क्रोधरहित है। भक्तों की भक्ति से तुरंत प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों की कामनाओं को पूरा करने का वरदान देती हैं।
ध्यान मंत्र
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमंडलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
बीज मंत्र
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
पूजा विधि
सर्वप्रथम मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान कर चाहिए। इसके बाद मां का प्रिय रंग के वस्त्रों को धारण करना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग है पीला या सफेद रंग। इस रंग के वस्त्र धारण कर मां की आराधना करनी चाहिए। इसके बाद लाल पुष्प लेकर मां का ध्यान करें। मां का पंचामृत से अभिषेक कर वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य से उनकी पूजा करें। मां के सामने घी का दीपक प्रज्जवलित कर बीज मंत्र या ध्यान मंत्र का जप करें। इसके अलावा ''या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।'' मंत्र का 108 बार जप कर सकते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में शक्कर या शक्कर से बनी चीजें अर्पित करना चाहिए। मां को शक्कर या शक्कर से बनी चीजें अर्पित करने से जीवन में समस्त प्रकार की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। साथ समस्त प्रकार की सुख, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल का पुष्प अर्पित करना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी को कमल का पुष्प अति प्रिय है। मां ब्रह्मचारिणी को कमल का पुष्प अर्पित करने से जीवन में सुख संवृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। पूजा के बाद मां की आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
एक कथा के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी पूर्व जन्म में पर्वत राज हिमालय की पुत्री है। भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए मां ब्रह्मचारिणी ने कठोर तप किया। इसे इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया पौराणिक कथा के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी ने एक हजार वर्ष तक फल-फूल खाकर बिताए। सौ वर्ष तक जमीन पर रहकर साख पर निर्वहन किया। मां ब्रह्मचारिणी ने कठिन उपवास रखे और खुले आसमान के नीचे वर्षा और धूप को सहन करती रहीं। टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रही। जब भगवान् शिव प्रसन्न नहीं हुए तो मां ने बिल्व पत्र भी खाना छोड़ दिया। कई हजार सालों तक निर्जल और निराहार रहकर तपस्या करती रही। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण मां ब्रह्मचारिणी का नाम अपर्णा पड़ गया। कठोर तपस्या के कारण मां ब्रह्मचारिणी बहुत कमजोर हो गईं। इस तपस्या देख देवता, ऋषि-मुनि सभी ने सराहना की और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।
Updated on:
08 Oct 2021 10:10 am
Published on:
08 Oct 2021 10:07 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
