
New Swagat Vihar Illegal Colony : राजधानी के चर्चित न्यू स्वागत विहार के नए लेआउट को लेकर नगर निगम में अब माथापच्ची की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नगर निगम अब यह तय करेगा कि कितने लोग निगम सीमा के दायरे में हैं, उतने लोगों का विकास शुल्क तय करने सहित प्लाॅट चिह्नांकन से लेकर अवैध कॉलोनी को वैध करने का खाका तैयार करेगा। वहीं बोरियाकला और सेजबहार पंचायत आने वालों के लिए विकास शुल्क एसडीएम और तहसीलदार की कमेटी तय करेगी।
यह स्पष्ट हो गया है कि रजिस्ट्री दोबारा कराने की नौबत खासतौर पर उन प्रभावितों के सामने ज्यादा है, जिन्हें बिल्डर द्वारा अपने लेआउट में शासकीय जमीन शामिलात कराकर 25 एकड़ में प्लाॅटिंग कर बेचा था और अब अवैध घोषित होने पर जिन्हें गार्डन, सामुदायिक भवन, ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित जगह में प्लाॅट मिला है। अफसरों के अनुसार ऐसे लोगों को दोबारा रजिस्ट्री कराना होगा या फिर फिर राज्य सरकार विशेष प्रकरण मानते हुए दोबारा रजिस्ट्री कराने की बाध्यता को नि:शुल्क कर दे। क्योंकि उतनी जमीन आरडीए के नए लेआउट में बाहर कर दी गई है।
निगम सीमा में करीब 1000 हजार लोग आ रहे
न्यू स्वागत विहार मामले को सुलझाने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार ने बड़ी पहल की थी, जिससे कि प्रभावितों न्याय मिल जाने की आस जगी। आरडीए को नोडल एजेंसी नियुक्त करके पूरे मामले को सुलझाने का दायित्व सौंपा था। आरडीए के इंजीनियरों की टीम ने कई महीनों तक छानबीन करके 2910 लोगों की अधिकृत तौर पर सूचीबद्ध करते हुए सभी को अपने नए लेआउट में भूखंड सुनिश्चित किया। उसी से यह भी तय हुआ कि नगर निगम क्षेत्र में निगम और पंचायत क्षेत्र में राजस्व विभाग इस अवैध कॉलोनी को वैध करने की प्रक्रिया करेगा। इस निगम में प्रारंभिक प्रक्रिया में पता चला कि ऐसे 1000 लोग निगम के डूडा क्षेत्र में आ रहे हैं। बाकी पंचायत क्षेत्र के दायरे में हैं।
करीब 300 प्रभावित दोबारा रजिस्ट्री के दायरे में
आरडीए की सूची में लगभग 300 लोग ही ऐसे हैं, जिन्हें दोबारा रजिस्ट्री करानी पड़ सकती है। जिन्हें स्वागत विहार के शासकीय भूमि, नाले की जमीन की जगह गार्डन, ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित जगह में भूखंड नए लेआउट में मिला है। या फिर उन लोगों का जिनके भूखंड की जगह किसी दूसरी जगह तय हुई है।
सहमति का भी तरीका अपनाया गया
आरडीए के अधिकारियों के अनुसार आपसी सहमति का भी तरीका अपनाया गया था। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति ने 1500, 2000 या 2500 वर्गफीट का भूखंड खरीदा था और उस अब लेआउट में उसी जगह पर 1300, 1800 या 2200 वर्गफीट का भूखंड मिल रहा था और उस पर सहमति दे दिया। तो उसके भूखंड का स्थान नए लेआउट में नहीं बदला।
स्वागत विहार में कई एकड़ सरकारी और नाले की भूमि दबी हुई थी, जिसे अलग करके ही नए लेआउट को शासन से स्वीकृति मिली। नए लेआउट में खसरा, गांव और चौहद्दी भी बदली है, इस दायरे में लगभग 300 लोग आए। दोबारा रजिस्ट्री कराने में छूट देने का अधिकार शासन को है। - एमएस पांडेय, अधीक्षण अभियंता आरडीए
न्यू स्वागत विहार मामले को लेकर विभागीय तौर पर अभी प्रारंभिक चर्चा हुई है। जैसा शासन-प्रशासन का निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा। नए लेआउट में निगम की सीमा वाले भूखंडधारियों के लिए विकास शुल्क जरूर नगर निगम तय करेगा। परंतु अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। - निशीकांत वर्मा, नगर निवेशक, नगर निगम
Published on:
30 Jan 2024 09:18 am
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