
coronavirus positive cases contacts quarantine
रायपुर. कोरोना (Coronavirus) संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच टीबी (Tuberculosis) मरीजों का इलाज और जांच बाधित नहीं होगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आरएनटीसीपी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ केएस सचदेवा ने राज्यस्तरीय टीबी पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा है। पत्र में बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के बीच भी टीबी की रोकथाम और उपचार को लेकर प्रदान की जाने वाली सेवाओं को नियमित रखने की जरूरत है।
प्रवासी मजदूरों को मिले बेहतर सुविधा
पत्र में यह भी बताया गया है कि प्रवासी मजदूरों में टीबी से ग्रसित होने की संभावना अधिक है, इसलिए संभावित लोगों की जांच की जाए। कोरोना वायरस के मद्देनजर बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में यदि किसी मजदूर में टीबी के लक्षण हों तो भी उनकी जांच की जानी चाहिए। इसके लिए सरकार ने टोल फ्री नंबर (1800-11-6666) जारी किया है।
लेबोरेटरी में सेफ्टी मेजर
- टीबी सैंपल लेने के बाद साबुन और पानी से हाथ धोएं।
- लेबोरेटरी के आसपास खाना खाने और पानी पीने से बचें।
- लेबोरेटरी में अधिक व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक।
- लेबोरेटरी के सतह 1 फीसदी सोडियम हाइपोक्लोराइड से सैनिटीज्ड करें।
- बायो मेडिकल वेस्ट को राष्ट्रीय गाइडलाइन के तहत डिस्पोज़ करें।
इस तरह मिलेगी सेवा
ग्रीन जोन: टीबी संबंधी सभी सेवाएं सामान्य तरीके से प्रदान की जाए। इसमें दवाओं का वितरण, सैंपल का ट्रांसपोर्टेशन, मरीजों का आवागमन आदि शामिल है।
ऑरेंज जोन: कोविड-19 के संक्रमित क्षेत्र में कुछ नामित अधिकारियों को छोड़कर शेष कर्मी संबंधित सेवाओं को प्रदान करने में शामिल रहेंगे।
रेड जोन: टीबी अस्पतालों में ओपीडी भीड़ से कोरोना संक्रमण के बढ़ने की आशंका को देखते हुए टीबी मरीजों को 1 महीने की दवा और अत्यधिक गंभीर स्थिति में 2 महीने की एंटी टीबी दवाएं देंगे।
Published on:
01 May 2020 10:08 pm
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