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रिपोर्ट कार्ड : विधानसभा में पहली बार चुनकर आए, पर चुप नहीं बैठे अधिकतर विधायक

भाजपा नेताओं नए विधायकों में से 30 प्रतिशत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है वहीं कांग्रेस नेता नए विधायकों में से 55 प्रतिशत को ए ग्रेड दे रहे हैं

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रिपोर्ट कार्ड : विधानसभा में पहली बार चुनकर आए, पर चुप नहीं बैठे अधिकतर विधायक

मिथिलेश मिश्र@रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए 2013 में हुए चुनाव अपने नतीजों में काफी रोचक रहा। कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। वहीं 53 लोग पहली बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे। इनमें से 28 भाजपा, 23 कांग्रेस, एक बसपा के टिकट पर और एक निर्दलीय के तौर पर चुने गए थे। इनमें भाजपा की 5 और कांग्रेस से 3 विधायक महिलाएं थीं।

90 सदस्यों वाली विधानसभा में इतने नए लोगों की वजह से आशंकाएं उपजीं। राजनीतिक पंडितों को लगा कि विधानसभा और उसके बाहर नए चेहरों की राजनीतिक सक्रियता कम रहेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पहली बार चुनकर आए विधायकों में से अधिकतर चुप नहीं बैठे। सदन में भी आवाज उठाई और बाहर भी। भाजपा नेताओं की माने तो उनके नए विधायकों में से 30 प्रतिशत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। वहीं कांग्रेस नेता अपने नए विधायकों में से 55 प्रतिशत को ए ग्रेड दे रहे हैं। बसपा के एकमात्र विधायक ने भी अच्छी छाप छोड़ी है।

भाजपा ने पहली बार आए चंपा देवी पावले, सुनीती राठिया, शिवशंकर पैकरा, लखन देवांगन, तोखन साहू, अम्बेश जांगड़े, रूप कुमारी चौधरी, गोवर्धन सिंह मांझी, लाभचंद्र बाफना और मोतीराम चंद्रवंशी को संसदीय सचिव बनाया। भोजराज नाग को बस्तर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष। कांग्रेस ने पहली बार चुने गए उमेश पटेल को युवक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वहीं देवती कर्मा को कई चुनावी समितियों में जगह दी।

इस उम्र वर्ग से आये नए विधायक

























आयु वर्गभाजपाकांग्रेस
25-352501
36-501609
51 से अधिक1213

कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आए अमित जोगी और आरके राय ने दो साल बाद ही अलग राह पकड़ ली। सदन के भीतर और बाहर कांग्रेस के खिलाफ ही मोर्चा खोल बैठे। जोगी निष्कासित हुए तो राय को निलंबन का सामना करना पड़ा। राज्यसभा चुनाव के समय मतदान का बहिष्कार किया। कांग्रेस ने दोनों की सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया है।

60 प्रतिशत कांग्रेस के अधिक वर्तमान विधायकों को टिकट मिलने का अनुमान

भाजपा नेताओं का कहना है कि नए में से कम से कम 40 फीसद को दोबारा टिकट मिल सकता है। वहीं कांग्रेस में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक का बताया जा रहा है। बसपा के एकमात्र विधायक को दोबारा टिकट मिलना तय माना जा रहा है।

कांग्रेस के टिकट पर चुनकर आए अमित जोगी और आरके राय ने दो साल बाद ही अलग राह पकड़ ली। सदन के भीतर और बाहर कांग्रेस के खिलाफ ही मोर्चा खोल बैठे। जोगी निष्कासित हुए तो राय को निलंबन का सामना करना पड़ा। राज्यसभा चुनाव के समय मतदान का बहिष्कार किया। कांग्रेस ने दोनों की सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया है।

कांग्रेस : आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस स्वच्छ छवि और युवा कार्यकर्ताओं पर दांव खेलने की तैयारी में है। पिछले अनुभव के आधार पर कुछ प्रत्याशियों का टिकट कटना तय है। टिकट वितरण से पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सर्वे करवा कर यहां की जनता का मन टटोला है।

भाजपा : मतदाताआं की नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने नए प्रत्याशियों पर ज्यादा दांव खेला है। माना जा रहा है कि इस बार भी मौजूदा विधायकों में ४० फीसदी का टिकट कटना तय है। पार्टी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि हमारे यहां व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन चुनाव लड़ता है। भाजपा का भी सर्वे लगभग पूरा हो गया है।

इन विधायकों ने बनाई अलग पहचान

भाजपा की युवा विंग से आए नवीन मारकंडेय आरंग के विधायक हैं। विधानसभा की कार्रवाइयों में सक्रिय रहे। क्षेत्र में लोगों से संपर्क करने का अलग तरीका बनाया।

कांग्रेस के टिकट पर मरवाही से जीतकर आए। सदन के भीतर खास शैली में सरकार पर हमला करने के लिए जाने गए। सदन के बाहर अपने ही दल के खिलाफ रहे।

रामानुजगंज से कांग्रेस के विधायक। क्षेत्र के मुददों को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सक्रिय। तमाम रोकटोक के बावजूद अपनी खास शैली में बात कहने की जगह बनाने के लिए मशहूर हो गए।

कोण्डागांव से कांग्रेस विधायक। विधानसभा में मुददे की पूरी तैयारी कर आने वालों में शुमार। क्षेत्र में भी लोगों के बीच पहुंचने के लिए बेरीकेड तोड़े। ग्रामीणों के साथ खुद श्रमदान किया।

महासमुंद से निर्दलीय विधायक। अपनी शराब विरोधी मुहिम को विधानभवन तक ले आए। हर सत्र में शराब विरोधी स्लोगन लिखा कुर्ता पहनकर आते रहे। क्षेत्र के मुददों पर सरकार को घेरा।