
अनुपम राजीव राजवैद्य / रायपुर
65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा 13 अप्रैल को की गई। फीचर फिल्मों के पैनल की अध्यक्षता जाने-माने फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने इसकी घोषणा की है। फिल्म न्यूटन को साल की सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म चुना गया है। विदित हो कि फिल्म 90वें ऑस्कर पुरस्कार में भारत की ओर से आधिकारिक प्रविष्टि भी थी।
फिल्म न्यूटन की शूटिंग छत्तीसगढ़ में हुई है और इसकी पृष्ठभूमि नक्सल समस्या है। फिल्म में बस्तर के कलाकारों ने महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं।
डायरेक्टर ने कहा- शुक्रिया छत्तीसगढ़
फिल्म न्यूटन के निर्देशक अमित मसुरकर ने उम्मीद जताई है कि उनकी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद भारत में प्रासंगिक राजनीतिक सिनेमा बनाने के लिए और दरवाजे खुल जाएंगे। उन्होंने कहा कि न्यूटन एक बेहतरीन कलाकारों की टीम, यूनिट और छत्तीसगढ़ के लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं होती, जहां यह फिल्म फिल्माई गई है।
बैलाडीला-कोंडागांव के कलाकारों ने निभाए किरदार
फिल्म न्यूटन में कोंडागांव के रहने वाले खिरेंद्र यादव ने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है। उनके साथ ही बैलाडीला के मंगल कुंजाम, इशरार, मनधर, नीलधर, दुर्जन और सुकली आदि स्थानीय कलाकारों ने फिल्म में महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं। अमित मसूरकर द्वारा निर्देशित फिल्म न्यूटन का एक मजबूत पक्ष इसकी रियल लोकेशन है। इस फिल्म की शूटिंग छत्तीसगढ़ के जंगलों, दल्लीराजहरा, बस्तर आदि जगहों पर हुई है।
पत्रिका से राजकुमार राव ने यह कहा था
शूटिंग के दौरान फिल्म के एक्टर राजकुमार राव ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया था कि छत्तीसगढ़ में फिल्म की शूटिंग करते समय उन्होंने नक्सल समस्या का समझा है। उन्होंने कहा था कि सरकार को बातचीत करके नक्सल समस्या का हल निकालना चाहिए। राजकुमार राव ने यह भी कहा था कि फिल्म के माध्यम से दर्शक छत्तीसगढ़ की नक्सल प्रभावित पृष्ठभूमि से रूबरू होंगे और जानेंगे कि इन इलाकों में चुनाव के समय जाने वाली पोलिंग पार्टी को कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
नक्सली इलाके में चुनाव ड्यूटी
फिल्म में मुख्य किरदार राजकुमार राव का है। उनके अलावा पंकज त्रिपाठी, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिल्म में राजकुमार राव का नाम न्यूटन है। चुनाव के लिए न्यूटन की ड्यूटी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके अबुझमाड़ में लगा दी जाती है। यहां मात्र 76 आदिवासी गरीब मतदाता हैं और उन्होंने कभी मतदान ही नहीं किया है। पुलिस प्रशासन भी न्यूटन को यह बात समझाने की कोशिश करते हैं कि नक्सलियों के खौफ के कारण कोई वोट डालने नहीं आएगा। लेकिन डर और खौफ के बावजूद न्यूटन वोटिंग के लिए लोगों का इंतजार करता है और फिर धीरे-धीरे लोग वोटिंग के लिए आने लगते हैं।
Published on:
13 Apr 2018 06:49 pm
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