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प्रेशर नहीं, एंजॉय के साथ शुरुआत करें, जरूर सफल होंगे

10 दिनों माउंट एवरेस्ट और माउंट लहोत्से की चढ़ाई कर चुकी नैना सिंह धाकड़ ने कहा

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रायपुर. जब मैं चार-पांच साल की थी तब मेरे पिता गुजर गए। तबसे हमारे बुरे दिन शुरू हो गए थे। मेरे लिए मां ने बहुत ताने सुने। मां अक्सर यही कहती कि भले बुलंदियों में पहुंच जाओ लेकिन अपने पैर जमीं पर रखना। इस बात को मैं हमेशा फॉलो करती हूं। आज जब मैं पीछे जाकर खुद को देखती हूं तो लगता है यह सब कैसे हो गया। हम में से बहुतों को लगता है कि मुझसे नहीं हो पाएगा। ऐसा सोचने से बेहतर है हम शुरुआत तो करें। पहली बार असफल होंगे तो दूसरी बार प्रयास करेंगे। दूसरी बार फेल रहे तो तीसरी दफे कोशिश करेंगे। किसी भी काम को प्रेशर की बजाय एंजॉय के तौर पर करें। लगातार प्रयास से सफलता मिलेगी ही। यह कहा, बस्तर की बेटी और प्रदेश की पर्वतारोही नैना सिंह धाकड़ ने। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों तेजनिंग नोर्गे राष्ट्रीय पुरस्कार के तहत लैंड एडवेंचर सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं। वे देश की पहली महिला हैं जिन्होंने 10 दिनों के भीतर माउंट एवरेस्ट और माउंट लहोत्से की चढ़ाई की। शनिवार को वृंदावन हॉल में हिंदी साहित्य व्यंग्य संस्थान और किरण चौबे स्मृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परसाई जन्मशती मौके पर बोल रहीं थीं। उन्हें खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

पत्रिका से कहा- माउंटेनर को भी मिले जॉब कोटा

स्पोट्र्स मैन की तर्ज पर माउंटेनर को सरकारी नौकरी में कोटा मिलना चाहिए? इस पर नैना ने कहा- हां ये बहुत जरूरी है। सिचुएशन के हिसाब से कानून और नियम बनाने पड़ते हैं। पर्वतारोही राज्य के पर्वतारोही क्यों स्पांसर का इंतजार करें। क्यों न उनके लिए एक कोटा हो। दूसरे राज्यों में इस बात का ध्यान रखा जाता है। मैं चाहती हूं हमारे राज्य से 36 ऐसी बेटियां निकले जो मुझसे भी ऊपर जाए। कई स्टेट में जॉब का कोटा है। एडवेंचर इंस्टीट्यूट बना दिया गया है। यूपी में यदि कोई पर्वतारोही 8000 मीटर की चढ़ाई पूरी कर लेता है तो उन्हें 15 लाख रुपए हैंडओवर करते हैं। मैंने दो चढ़ाई कर ली है लेकिन यहां तो कोई रिस्पांस नहीं मिला। कभी-कभी मुझे यह भी लगता है बस्तर जैसे पिछड़े इलाके से आती हूं इसलिए मेरे साथ ऐसा हो रहा है?

इनका भी हुआ सम्मान

हिंदी व्यंग्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए इंदौर के बृजेश कानूनगो को हरिशंकर परसाई सम्मान दिया गया। समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए ज्ञानेश शर्मा को छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान, हिंदी व छत्तीसगढ़ी साहित्य में उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए उर्मिला शुक्ल को सम्मानित किया गया। इसी तरह समाजसेवा के लिए युवा पहल रायपुर को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

असहमति ही व्यंग्य की जननी

हमारे समय में व्यंग्य और परसाई विषय पर अपना विचार व्यक्त करते हुए दिल्ली के व्यंग्यलोचक रमेश तिवारी ने कहा कि असहमति लोकतंत्र की आवश्यकता है और यथास्थिति से असहमति ही व्यंग्य की जननी है। आज असहमति के सम्मान और विसंगतियों की पहचान और प्रहार के लिए लोकतंत्र, व्यंग्य और परसाई सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। संस्थान के अध्यक्ष राजशेखर चौबे के व्यंग्य संग्रह निठल्लों का औजार सोशल मीडिया, सचिव वीरेन्द्र सरल के व्यंग्य संग्रह तुम चंदन हम पानी का विमोचन किया गया। संचालन शुभ्रा ठाकुर ने किया।