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5 डिसमिल से कम भूमि की होगी रजिस्ट्री और नामांतरण, पर फायदा मिलेगा सिर्फ बिल्डरों को

बिल्डर अब 5 डिसमिल जमीन खरीद कर उसे अलग-अलग प्लाट में काट कर रजिस्ट्री करा पाएंगे

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5 डिसमिल से कम भूमि की होगी रजिस्ट्री और नामांतरण, पर फायदा मिलेगा सिर्फ बिल्डरों को

जितेन्द्र दहिया@रायपुर. पांच डिसमिल यानि 2178 वर्ग फीट से छोटे प्लाटों की रजिस्ट्री और नामांतरण पर लगी रोक को राजस्व विभाग ने कुछ शर्तों के साथ हटा लिया है। इस छूट से बिल्डरों को तो फायदा होगा, लेकिन आम आदमी को फिलहाल राहत नहीं मिलेगी।

बिल्डर अब 5 डिसमिल जमीन खरीद कर उसे अलग-अलग प्लाट में काट कर रजिस्ट्री करा पाएंगे। शासन ने 2014 में राजधानी समेत पूरे प्रदेश में 5 डिसमिल (2178 वर्गफीट) से छोटे प्लाटों के नामांतरण पर रोक लगा दी थी। बाद में रजिस्ट्री पर भी पाबंदी लगा दी गई। 19 सितम्बर 2018 को विभाग के सचिव ने एक निर्देश जारी करते हुए प्लाटिंग की गई डायवर्टेड भूमि पर से रोक हटा दी है। आदेश में साफ लिखा है कि रेखीय परियोजनाओं में आने वाली ग्रामों की समस्त भूमि एक ही लेआट में होती है।

रेखीय परियोजना में आने वाली भूमि को एक ही खसरा नंबर दिया जाता है। लिहाजा एेसी परियोजनाओं के लिए यह छूट रहेगी। वहीं, यदि किसी व्यक्ति ने बिना रेखीय परियोजना वाले इलाके में भूमि खरीदी है तो उन्हें यह छूट नहीं मिलेगी। उन्हें न तो उस प्लाट में मकान बनाने की अनुमति मिलेगी और न ही लोन मिलेगा।

अब सॉफ्टवेयर तय करेगा खसरा
यदि बिल्डर अलग-अलग 3 भूस्वामियों से 5-5 डिसमिल भूमि खरीदकर प्लाटिंग करता है तो उसके तीनों जमीन के पुराने खसरे का अस्तित्व नहीं रहेगा। कंप्युट्राइज्ड सॉफ्टवेयर से नया खसरा जनरेट किया जाएगा। यह खसरा भूमि के काटे गए अलग-अलग प्लाट के हिस्से पर आधारित रहेगा।

सरकारी परियोजनाआें के लिए यह छूट
सरकारी प्रोजेक्ट में एक से अधिक खसरा नंबर की भूमि आ रही हो, वहां ५ डिसमिल से कम क्षेत्रफल के लिए प्रतिबंध इस शर्त पर समाप्त किया गया है कि एेसा भूमि का क्रय या अर्जन करने के बाद मूल भूस्वामी के पास उस खसरा नंबर पर अतिरिक्त ५ डिसमिल जमीन होनी चाहिए।

7000 से ज्यादा प्रकरण लंबित
इस नियम की वजह से आम लोगों की मुसीबत कम नही हुई है। केवल राजधानी में रजिस्ट्री के दस्तावेज लेकर नामांतरण करने पहुंचे ७००० से ज्यादा प्रकरणों को प्रशासनिक अमला लौटा चुका है। प्रदेश में यह संख्या बहुत अधिक होने का अनुमान है। प्रदेश के राजस्व विभाग ने भू-राजस्व संहिता 1969 की धारा 70 के हवाले से नामांतरण पर रोक का यह आदेश जारी किया था। आदेश के मुताबिक 5 डिसमिल (लगभग 2178 वर्ग फीट) से कम कृषि भूमि और 100 वर्ग फीट से कम डायवर्टेड भूमि का नया खसरा नंबर नहीं दिया जा सकेगा।

एक व्यक्ति के लिए शिथिल किया था आदेश
इसी साल फरवरी में हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला देते हुए कहा था कि भू राजस्व संहिता की धारा 109 और 110 के प्रावधानों के तहत 5 डिसमिल से कम जमीन खरीदने पर भी नामांतरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने रायपुर के अतिरिक्त तहसीलदार के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में नामांतरण के निर्देश दिए था।

रायपुर निवासी मोहन लाल साहू, वैभव खरे और वरुण खरे ने ग्राम रायपुरा में 0.03 डिसमिल जमीन खरीदी थी। तीनों ने नामांतरण के लिए संबंधित तहसीलदार कार्यालय में आवेदन दिया। अतिरिक्त तहसीलदार ने राज्य शासन द्वारा जून 2014 में जारी किए गए सर्कुलर और रायपुर कलक्टर के आदेश का हवाला देते नामांतरण से इनकार करते हुए उनके आवेदन खारिज कर दिए। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं प्रस्तुत की थीं।

इसमें कहा गया था कि भू राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत नामांतरण से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के नोटिस पर शासन की तरफ से बताया गया कि भू राजस्व संहिता की धारा 98 के तहत नियम तय किए गए हैं कि कृषि भूमि का 5 डिसमिल से कम उपखंड न किए जाएं। मामले पर जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच ने भू राजस्व संहिता और ट्रांसफर ऑफ प्रापर्टी एक्ट का हवाला देते हुए कहा है कि दोनों अधिनियमों में इस तरह के नामांतरण में कोई रोक नहीं लगाई गई है।

भू राजस्व संहिता में छोटे प्लाट के नामांतरण पर रोक का नियम काफी पहले से है। रेखांकित परियोजनाओं के लिए छूट भी पहले से ही है। इस बारे में समय-समय पर रिमाइंडर जारी किए जाते हैं। रोक का मौजूदा आदेश भी उसी नियम का रिमाइंडर ही है।
एन.के. खाखा, राजस्व सचिव, छत्तीसगढ़