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नर्सिंग होम एक्ट का खुलेआम उल्लंघन, एेसे हो रहा मरीजों की जान से खिलवाड़

ताज्जुब की बात यह है कि पांच सालों में अभी तक आधे से अधिक नर्सिंग होम को लाइसेंस ही जारी ही नहीं किया गया है।

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सीकर के सबसे बड़े कल्याण अस्पताल में मरीजों को खून चढ़ाने का संकट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में वर्ष-2013 से नर्सिंग एक्ट लागू है, जिसके तहत सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथलैब समेत फिजियोथैरेपी सेंटर का संचालन एक्ट के अनुसार किया जाना है। ताज्जुब की बात यह है कि पांच सालों में अभी तक आधे से अधिक नर्सिंग होम को लाइसेंस ही जारी ही नहीं किया गया है। बिना लाइसेंस के ही गली-कूचों में सैकड़ों नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की दलील है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से रिपोर्ट नहीं मिलने की वजह से लाइसेंस अटके हुए हैं। वहीं, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास कोई मामला पेंडिंग नहीं है। एक्ट लागू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ कार्यालय में लाइसेंस के लिए 280 आवेदन आए थे। इसमें से 130 को लाइसेंस जारी कर दिया गया। 150 आवेदन अभी भी लंबित हैं।

6 माह से अधिक समय से नहीं हुई बैठक
कलक्टर की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस देने के लिए बैठक होती है। राजधानी में छह माह से कोई बैठक नहीं हुई है। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सहायक कलक्टर, नगर निगम के आयुक्त, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी शामिल होते हैं।

जान की गारंटी नहीं
एक्ट को ठीक तरीके से लागू नहीं करने के कारण गली-कूचों तक में नर्सिंग होम खुले हुए हैं। राजधानी में कई नर्सिंग होम्स में इलाज के नाम पर भारी भरकम फीस तो ली जा रही है, लेकिन जान की सुरक्षा और सही इलाज की कोई गारंटी नहीं है। यहां पर अप्रशिक्षित नर्सें और स्टाफ मरीजों की देखभाल कर रहे हैं। कई नर्सिंग होम में उपचार कराने के लिए मरीज व उनके परिजनों को जेवरात, खेत व घर तक बेचना पड़ जाता है।

180 में से सिर्फ 95 पैथोलॉजी सेंटर को लाइसेंस
5 सालों में रायपुर के 180 पैथोलॉजी सेंटरों में से महज 95 को ही लाइसेंस जारी किया गया है। जिन सेंटरों को लाइसेंस नहीं मिला है वहां फायर फायइटर और पार्र्किंग की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।

रायपुर सीएमएचओ, डॉ. के.एस. शांडिल्य ने कहा, 130 नर्सिंग होम को लाइसेंस जारी किया गया है। 150 के लाइसेंस टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की तरफ से अटका है। जैसे ही वहां से रिपोर्ट मिलेगी, लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग असिस्टेंट डायरेक्टर विनीत नायर ने कहा, कुछ लोगों ने नियमितिकरण के लिए जरूर लगाया था, जिसको निगम के पास भेज दिया गया था। निगम से कुछ इनपुट मिलने के बाद लाइसेंस के लिए किए आवेदनों की जांच की गई थी। कमियां पाई गई थी, जिसको रद्द कर दिया गया था।

नर्सिंग एक्ट के तहत होनी चाहिए ये सुविधाएं
स्त्री-पुरुष के लिए अलग-अलग प्रसाधन
संक्रामक मरीजों के लिए अलग से कमरा
अग्निशमक उपकरण की व्यवस्था
पुरुष-महिला के लिए अलग-अलग वार्ड
बिस्तर के बगल में ऑक्सीजन सप्लाई सुविधा
बिस्तरों के बीच में पर्दा विभाजन
प्रत्येक बिस्तर के बगल में सेक्शन मशीन
प्रशिक्षित नर्स और सहायक स्टाफ
गंभीर बीमारियों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे के भीतर दिए जाने की व्यवस्था