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धान खरीदी मुद्दे को लेकर सदन में बवाल! मंत्री के जवाब को रटा-रटाया बताकर ​विपक्ष ने किया वॉकआउट

CG Assembly Session 2026: धान की खरीदी मुद्दे को लेकर सदन में गहमा गहमी हो गई। वहीं मंत्री के जवाब को विपक्ष ने रटा-रटाया बताकर सदन से वॉकआउट हो गए।
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रायपुर

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Laxmi Vishwakarma

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Updated: 10 Mar 2026, 7:31 AM IST

विपक्ष ने किया वॉकआउट (photo source- Patrika)

विपक्ष ने किया वॉकआउट (photo source- Patrika)

CG Assembly Session 2026: विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को धान खरीदी को लेकर विपक्ष ने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को घेरा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लाचारी की वजह से सभी पंजीकृत किसानों से धान खरीदी नहीं हो सकी। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार ऋणी किसानों का कर्ज माफ करें या फिर उनके पास रखे धान की खरीदी करें।

विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए किया वॉकआउट

इस पर मंत्री बघेल ने कहा कि सोसाइटी में जो किसान धान बेचने आए, उन सभी से धान की खरीदी की गई है। जो धान बेचने नहीं आए, उनसे खरीदी नहीं हुई है। विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान विधायक लखेश्वर बघेल ने धान खरीदी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में 44,612 किसान धान नहीं बेच पाए। मंत्री ने कहा कि खरीदी केंद्र में आने वाले सभी किसानों से धान की खरीदी की है।

इस पर विधायक बघेल ने कहा कि किसान लगातार एसडीएम कार्यालय और हर जगह चक्कर काटता रहा। सबसे बड़ा घोटाला धान खरीदी में हो रहा है। मिट्टी-मुरुम और कोई पानी डाल रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि पहले भी पंजीयन कराने वाले किसानों से शत-प्रतिशत खरीदी नहीं होती थी। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि टोकन कटने के बाद कितने किसान धान नहीं बेच पाए। कितनी ऋणी किसानों ने धान नहीं बेचा। इस पर मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार में भी ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा गया था।

किसानों ने लिया कर्जा

CG Assembly Session 2026: एक प्रश्न में विधायक कवसी लखमा ने पूछा कि आदिवासी किसानों की धान की खरीदी क्यों नहीं हुई? वो कैसे अपना कर्ज चुकाएगा। मंत्री ने फिर अपना जवाब दोहराते हुए कहा कि जो किसान खरीदी केंद्र तक धान लेकर पहुंचे थे, उनका धान हमने खरीदा है, जो नहीं पहुंचे उनका धान नहीं खरीदा गया। लखमा ने कहा कि किसानों का पंजीयन हुआ, टोकन कटा, लेकिन उसके बाद भी किसानों से धान नहीं खरीदा गया।

बस्तर के किसानों को धान का 206 करोड़ रुपए मिलना था, उन किसानों का अब क्या होगा? किसानों ने कर्जा लिया है, उसको कौन पटाएगा। उन्होंने मांग की कि ऋणी किसानों के पास रखे धान की खरीदी करें या फिर कर्ज माफी करें। खाद्य मंत्री ने कहा कि जो भी किसान ऋण लेता है, उसका धान खरीदा जाता है, लेकिन धान खरीदा उनका जाता है, जो खरीदी केंद्र तक आते हैं। मंत्री के रटारटाया जवाब से नाराज होकर विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।