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Fake Sim Card: दूसरे के नाम पर 300 से अधिक फर्जी सिम, कहीं आपके नाम से भी तो रिजस्टर्ड नहीं, बढ़ रहा साइबर खतरा

Fake Sim Card: रायपुर ग्रामीण के माना थाने में 20 लाख से अधिक की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज हुआ था। इसमें इंडसइंड बैंक के म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम शामिल थे।
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रायपुर

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Love Sonkar

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Updated: 11 Apr 2026, 12:40 PM IST

Fake Sim Card: दूसरे के नाम पर 300 से अधिक फर्जी सिम, कहीं आपके नाम से भी तो रिजस्टर्ड नहीं, बढ़ रहा साइबर खतरा

Fake Sim Card: @नारद योगी। ऑनलाइन सट्टा व साइबर ठगी के लिए दूसरों के नाम से सिम कार्ड लेकर इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ रेंज साइबर थाना की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। अलग-अलग शहरों में छापा मारकर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सिम कार्ड बेचने वाले पॉस एजेंट भी शामिल हैं। आरोपियों ने अब तक 300 से ज्यादा सिम कार्ड बेचा है, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और सट्टा के लिए किए जा रहे हैं। मामले में जांच जारी है।

पुलिस के मुताबिक रायपुर ग्रामीण के माना थाने में 20 लाख से अधिक की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज हुआ था। इसमें इंडसइंड बैंक के म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम शामिल थे। इसी तरह आजाद चौक थाने में 6.42 लाख की साइबर ठगी का केस दर्ज है। इसमें साउड इंडियन बैंक के म्यूल अकाउंट व मोबाइल सिम का इस्तेमाल हुआ है। रेंज साइबर थाना की टीम दोनों मामलों की जांच कर रही है।

जांच के दौरान फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले और एजेंटों का पता चला। इसके बाद टीम ने भनपुरी के साहू मोबाइल शॉप से सुदीप्त सासमल, उरला के रुद्रा मोबाइल और बलौदाबाजार के शिवकृपा मोबाइल के संचालक शिवनारायण साहू, दुर्ग के लहरी मोबाइल दुकान के जयंत लहरी, महावीर नगर रायपुर के आहूजा मोबाइल के संचालक मनीष आहूजा, भिलाई के जामुल के नेयानी मोबाइल के कैलाश प्रताप सिंह और पंडरी से विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी वीआई, जियो, एयरटेल कंपनी के सिम कार्ड बेचते थे।

300 से अधिक सिम का इस्तेमाल

पकड़े गए आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में प्री एक्टिवेटेड सिम के अलावा 300 से अधिक सिम कार्ड का ऑनलाइन ठगी और सट्टे में इस्तेमाल होने का खुलासा किया है। पुलिस इसकी जांच कर रही है।

ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा

पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि नया सिम लेन या सिम पोर्ट कराने वाले कस्टमर उनके पास आते थे। इस दौरान उनसे डबल थंब स्कैन या आई ब्लिंक करवाते हुए ई-केवायसी करते थे। इससे दो सिम चालू करते थे। इसके बाद जिस कस्टमर के पास आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी होती थी, उसका विवरण स्वयं ही वेरीफाई कर देते थे।

इस तरह ई-केवायसी के माध्यम से एक्स्ट्रा सिम चालू कर लेते थे। इसके बाद इन दूसरों के नाम की सिम को 700 से लेकर 1500 रुपए में सट्टेबाजों और साइबर ठगों को बेच देते थे। फर्जी सिम खरीदने वाले दो आरोपी सुधीर जैन और विनोद वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है।

इनमें होता था इस्तेमाल

इन मोबाइल सिम कार्डों का इस्तेमाल म्यूल बैंक खाता, टेलीग्राम रिव्यू टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्राड, फेक सोशल मीडिया फ्राड, शेयर ट्रेडिंग आदि साइबर ठगी में होता था। इसके अलावा ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा में भी इसका उपयोग किया जा रहा है।