
छत्तीसगढ़ी भाषा को पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे ने वैश्विक पहचान दिलाई: CM साय
CG News: डॉ. सुरेन्द्र दुबे छत्तीसगढ़ के बिरले साहित्यकारों की पंक्ति के सितारे थे। जिनकी चमक सत्ता के गलियारों तक भी पहुंचीं। बेमेतरा जैसे छोटे शहर से निकलकर वे अंतरराष्ट्रीय ख्याति के कवि हो गए। वे दुर्ग शहर जनवादी लेखक संघ के पहले अध्यक्ष बने। तब वे मंचों के उभरते कवि थे।
चार दशक पहले के ख्यातिप्राप्त कवियों के बीच सामुदायिक विकास विभाग के कवि सम्मेलन में उन्हें बड़ा अवसर मिला। उसके बाद स्थिति इस शेर के भाव के अनुरूप हो गई- वो आए बज़्म में ,इतना तो मीर ने देखा, फिर उसके बाद सितारों में रोशनी न रही।
डॉ. दुबे ने दुर्ग जिला साक्षरता अभियान में योगदान दिया। वे मुझसे तीन वर्ष छोटे थे। अपने अग्रजों को वे बहुत आदर देते थे। उन्होंने कई कामयाब नाटक लिखे। वे छत्तीसगढ़ के ऐसे कवि सिद्ध हुए, जिसे सही मायनो में अखिल भारतीय कहा जा सकता है। डॉ. सुरेन्द्र दुबे राजभाषा आयोग के तीन अध्यक्षों के कार्यकाल में सफल और शक्ति सम्पन्न सचिव रहे।
( जैसा भिलाई से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने पत्रिका को बताया)
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे के निवास पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों से भेंट कर संवेदना प्रकट की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य और हास्य काव्य के शिखर पुरुष पद्मश्री डॉ. सुरेन्द दुबे ने अपने विलक्षण हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य और अनूठी रचनात्मकता के माध्यम से न केवल देश-विदेश के मंचों को गौरवान्वित किया, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। जीवनपर्यंत उन्होंने समाज को हंसी का उजास दिया, लेकिन आज उनका जाना हम सभी को गहरे शोक में डुबो गया है।
Updated on:
27 Jun 2025 10:42 am
Published on:
27 Jun 2025 10:37 am
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