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सारी समस्या का हल एक लोटा जल, पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- छत्तीसगढ़ वासी धन्य, जहां भगवान भोलेनाथ स्वयं हुए प्रकट

अचार्य प्रदीप ने बताया सारी समस्या का हल एक लोटा जल है। पर वह जल भगवान भोलेनाथ को छल से, किसी के द्वेष भाव रखकर या बराबरी करने के लिए नहीं चढ़ाना चाहिए बल्कि अपने मन को साफ कर चढ़ाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भगवान को मानना है तो दिल से मानो।

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राजधानी के गुढ़ियारी स्थित दही हांडी मैदान में गुरुवार को शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक आचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने लाखों भक्तों ने शिव महापुराण की कथा का रसपान कराया। कथा में आगे बताते हुए महाराज जी ने बताया कि एक गौ माता चंपा वन में अंदर चली जाती थी और 15 दिन 20 दिन बाद घोर वन से वापस आती थी। मगर उस वन में किसी की जाने की हिम्मत नहीं थी।

एक दिन हिम्मत करके वह ग्वाला अंदर चला गया। वहां उन्होंने देखा कि गौमाता एक शिवलिंग के ऊपर अपनी दूध की धार गिरा रही थी। उस शिवलिंग में उस ग्वाले को भगवान शिव माता पार्वती और गणेश जी के दर्शन हुए। ग्वाला वहां से दौड़ते भागते अपने गांव गया और गांव वालों को यह खबर दी। पूरे गांव वाले वहां पर पहुंचे और वहां पर उस शिवलिंग में भगवान के दर्शन किए। तब आकाशवाणी हुई कि मैं इस चंपा वन में साक्षात विराजमान रहूंगा। तब से उस स्थान पर भगवान भोलेनाथ चंपेश्वर महादेव के रूप में पूजे जाने लगे।।


सारी समस्या का हल एक लोटा जल
अचार्य प्रदीप ने बताया सारी समस्या का हल एक लोटा जल है। पर वह जल भगवान भोलेनाथ को छल से, किसी के द्वेष भाव रखकर या बराबरी करने के लिए नहीं चढ़ाना चाहिए बल्कि अपने मन को साफ कर चढ़ाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भगवान को मानना है तो दिल से मानो।


दिन-रात ठहरते हैं भक्त, रात भर चलती है अराधना
शिव महापुराण आयोजन समिति के अनुसार शिव भक्तों की संख्या को देखते हुए गुरुवार को पंडाल का विस्तार किया गया है। रोज रात में लगभग आठ से दस हजार भक्त कथा स्थल पर ही रुकते हैं। रात तक भगवान भोलेनाथ का भजन कर कीर्तन करते हैं। उनके रहने और भोजन की व्यवस्था निश्शुल्क रूप से आयोजन समिति ने की है। भक्तों की भीड़ को देखते हुए निश्शुल्क ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है।