
वक्त पर नहीं मिला इलाज, अम्बेडकर अस्पताल के गेट पर स्वाइन फ्लू मरीज की मौत
रायपुर@KP Shukla । आम तौर पर सभी के दिमाक में यह बसा हुआ है कि सरकारी अस्पताल ( Dr. Bhim Rao Ambedkar Hospital ) में इलाज करना पहाड़ तोड़ने के बराबर जैसा है और इलाज के दौरान रहने और खाने की समस्या से सभी वाकिब हैं। ऐसे में मरीज और उनके परिजन, जो दूरांचल क्षेत्रों से इलाज कराने राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल ( Dr. Bhim Rao Ambedkar Hospital Raipur)में आते हैं। यहां उन्हें डॉक्टर महीने-पंद्रह दिनों तक रुककर इलाज कराने की सलाह देते हैं। उनके लिए 'मंगल भवन' मंगल साबित हो रहा है।
नाम मात्र के शुल्क में रहने, सुबह का नाश्ता और दोपहर व शाम के भोजन का भी इंतजाम इसमें किया गया है। कैंसर जैसी बीमारी की सिंकाई कराने या किसी अन्य बीमारी जिसमें ठीक होने में काफी वक्त लगता है। ऐसे मरीजों और उनके परिजनों के लिए मंगल भवन किसी बड़े सहारे से कम नहीं।
राजधानी (Raipur) का डॉ. अंबेडकर अस्पताल सबसे बड़ा है, जिसमें 1100 बिस्तर हैं। लेकिन अंदरूनी तस्वीर यह बताती है कि कई मरीज जमीन पर लेट कर इलाज कराते हैं। इस दिक्कत को देखते हुए पांच साल पहले अस्पताल (Hospital) के करीब एक ऐसा मंगल भवन (Mangal bhawan) की कल्पना की गई, जिसमें मरीज (Patients) और उनके परिजन आवश्यक होने तक रह सकें।
उन्हें सरायपाली, बलौदाबाजार, रायगढ़, सरगुजा, बस्तर जैसे क्षेत्रों क्षेत्रों से बार-बार आना-जाना न करना पड़े। यह कल्पना एक मंगल भवन (Mangal bhawan raipur) के रूप में साकार हुई और आज ऐसे 400 के करीब मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ा सहारा बना हुआ है।
फिर लोग जुड़ते गए
मंगल भवन की कल्पना की थी शहर के समाजसेवी सीताराम अग्रवाल ने। वे अपनी बातें यू बयां करते हैं-अकेले चला था मंजिल की तलाश में, लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया। इसी भावना के साथ मंगल भवन आकार ले सका। जिसमें मात्र का 50 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। यहां रुकने वाले मरीजों और उनके परिजनों को रुकने के साथ ही सुबह का नाश्ता और दोपहर व भोजन को भोजन देने की व्यवस्था की गई है।
गणेश मंदिर में पूजा, गाते हैं भजन
मंगल भवन के ही एक हिस्से में भगवान गणेश (lord ganesha) का मंदिर है। मंदिर के हॉल में भगवान से दुख दूर करने की दुआ करते हैं। वे मंदिर (temple) में पूजा करते हैं और भजन भी गाते हैं। महीना-पंद्रह दिनों तक रहने पर यह उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाता है। भवन में लिफ्ट के साथ 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो सके, इसके लिए जनरेटर की व्यवस्था भी की गई है। मंगल भवन सीसीटीवी कैमरे के दायरे में है, जिससे वहां की गतिविधियों नजर भी रखी जा सके।
दो और मंगल भवन हो गया तैयार
सीताराम अग्रवाल बताते हैं कि अंबेडकर अस्पताल (Dr. Bhim Rao Ambedkar Hospital) में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं को नजदीक से देखा है। सबसे बड़े डॉ अंबेडकर अस्पताल के पास मंगल भवन बनाने के बाद दूसरी जगहों पर भी एेसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निश्चित किया।
अब नया रायपुर स्थित श्री सत्य साईं अस्पताल (Sri Sathya SaiSanjeevani Hospital naya raipur) के सामने में 150 बिस्तर का मंगल भवन (Mangal bhawan) बनकर तैयार हो चुका है जिसका बहुत जल्दी ही शुभारंभ होगा। अम्बिकपुर में मंगल भवन का लोकार्पण 11 जुलाई को कराना तय हुआ है। इन दोनों जगहों पर मरीजों और उनके परिजनों को रहने और भोजन की सुविधा मिलेगी।
एम्स के सामने भी तैयार हो रहा मंगल भवन
शकुंतला देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख सीताराम अग्रवाल बताते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार से एम्स हास्पिटल के पास जमीन उपलब्ध कराने का मांग पत्र दिया था, ताकि मंगल भवन (Mangal bhawan )बनाया जा सके। लेकिन जमीन नहीं मिली तो खुद की जमीन ट्रस्ट को दान कर उसमें 400 बिस्तर का मंगल भवन बनाना शुरू किया, जिसमें परिवार का भी पूरा सहयोग मिला। अब एम्स हास्पिटल (Hospital near me) के करीब बरसाना एनक्लेव के बाजू में 5 मंजिला मंगल भवन दीवाली तक मरीजों और उनके परिजनों को मिल जाएगा।
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Updated on:
29 Jun 2019 07:28 pm
Published on:
29 Jun 2019 07:11 pm
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