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OMG! इस पटवारी की कमाई नहीं खर्चे सुनकर चौंक गए एंटी करप्शन ब्यूरो के अफसर

आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए पटवारी मिथलेश पाण्डेय मामले में रोचक तथ्य सामने आए हैं।

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Patwari Arrest

Patwari gets jail in case of more property than income

रायपुर . आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए पटवारी मिथलेश पाण्डेय मामले में रोचक तथ्य सामने आए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने अदालत को बताया है, पाण्डेय ने मार्च 2006 से अप्रेल 2016 तक पटवारी रहने के दौरान वेतन से उसकी कुल आय 22 लाख 44 हजार 835 रुपए की हुई। लेकिन छापे के दौरान उसकी इस अवधि में आय 64 लाख 24 हजार 203 रुपए बताई गई।

लेकिन इसी अवधि में पटवारी ने 2 करोड़ 21 लाख 82 हजार 488 रुपए खर्च किए। मतलब आय से 1 करोड़ 61 लाख 59 हजार 487 रुपए अधिक। अदालत ने माना कि गिरफ्तार पटवारी ने आय से 227.17 प्रतिशत अधिक रकम खर्च किया। हालांकि बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि एसीबी ने पत्नी और पुत्रों की आय भी इसके साथ जोड़कर दिखाई है। भ्रष्टाचार निरोधी कानून के विशेष न्यायधीश जितेंद्र कुमार जैन की अदालत ने शुक्रवार को अपराध को समाज के विरुद्ध मानते हुए पटवारी की जमानत अर्जी खारिज कर दिया।

फरारी भी बनी आधार
जमानत अर्जी को खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा, आरोपी को सूचना देने के बाद न्यायालय में अभियोगपत्र पेश हुआ। वह अदालत में पेश नहीं हुआ। न्यायालय ने गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया, लेकिन वह बचता रहा। इससे पता चलता है कि उसने एसीबी से सहयोग नहीं किया।

बतादें कि 22 अप्रैल 2016 को आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग (ईओडब्लू) और एसीबी की संयुक्त टीम ने डंगनिया के पटवारी मिथिलेश पांडेय के सुंदरनगर स्थित घर सहित अन्य ठिकानों पर छापामारा था। तलाशी में उसके पास अनुपातहीन संपति मिली थी।

जांच के बाद 5 अगस्त 2017 को अदालत में चालान पेश किया गया था। लेकिन, वह सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुआ। इसे देखते हुए कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसकी तामिली होते ही वह फरार हो गया था। शिनाख्त छिपाने के लिए आरोपी हुलिया बदलकर अपने दामाद के मठपुरैना स्थित घर में रहता था। देर रात को घर आने के बाद अल सुबह ही निकल जाता था।

पकड़े जाने के डर से उसने अपना मोबाइल नंबर तक बदल लिया था। टीम को इसकी भनक तक नहीं मिल पा रही थी। इसे देखते हुए लगातार घर के आसपास निगाह रखी जा रही थी। अचानक सूचना मिलने के बाद टीम ने दबिश दी और उसे पकड़ लिया।

गौरतलब है कि छापे के दौरान एसीबी के अफसरों ने मिथिलेश पांडेय के खिलाफ कार्रवाई को किसी भी पटवारी के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई बताया था। अफसरों के मुताबिक छापे में पटवारी से जितनी भी संपत्ति मिली, वह क्लास-वन अफसरों से कहीं ज्यादा थी।

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