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ऑपरेशन मानसून में पुलिस ने पहले दिन किया 8 दुश्मनों को ढ़ेर, नक्सलियों के पास से बरामद किए पेनगन

तिमेनार जंगल में पुलिस व नक्सली मुठभेड़ में मारे गए कई माओवादी, एक माह चलेगा ऑपरेशन मानसून
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रायपुर

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Deepak Sahu

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Updated: 21 Jul 2018, 8:54 AM IST

naxal attack

ऑपरेशन मानसून में पुलिस ने पहले दिन किया 8 दुश्मनों को ढ़ेर, नक्सलियों के पास से बरामद किए पेनगन

दंतेवाड़ा. बीजापुर और दंतेवाड़ा की सरहद पर तिमेनार जंगल में हुई मुठभेड़ में मारे गए आठों माओवादियों के शवों को गुरुवार देर रात दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय लाया गया। समर्पित माओवादियों से उनकी शिनाख्त कराई गई।

एसपी कमलोचन कश्यप ने बताया कि शिनाख्ती में पता चला कि 5-5 लाख के इनामी 4 और 1-1 लाख के इनामी 3 माओवादी मारे गए हैं। मुठभेड़ में शामिल जवानों के मुताबिक उनका मुकाबला प्लाटून नंबर-1 से हुआ था, जो वृद्ध माओवादी नेताओं की सुरक्षा में लगा हुआ था। माओवादी अपने नेताओं को सुरक्षित निकालने में सफल रहे। हालांकि, पुलिस अधिकारी यह खुलासा नहीं कर सके कि माओवादी नेता कौन थे। एसपी ने पत्रवार्ता में बताया कि बुधवार की सुबह बैलाडीला की तराई में ३ वृद्ध माओवादी नेताओं व अन्य के मौजूदगी की सूचना पर ऑपेरशन प्लान किया गया था। जवानों ने खुलासा किया कि दो किमी के दायरे में एक दर्जन टेंट लगाए थे।

मुठभेड़ में मारी गई जैनी से पेन गन बरामद किया गया। जवानों ने बताया कि जैनी जब घायल हुई तो उसके हाथ से इंसास छूट चुकी थी। उसने अपनी जेब से पेन गन निकाली और दो फायर कर दिए। मारक क्षमता कम होने से जवान को नुकसान नहीं हो सका। पेन गन में 9 एमएम का कारतूस इस्तेमाल होता है। पुलिस की पिस्टल की तरह माओवादियों की ये घातक बांसुरी 15 से 20 मीटर तक की रेंज में मार करती है।

5 लाख के इनामी : प्लाटून नंबर-1 का एक्शन कमांडर चंदरू, सेक्शन कमांडर सुगना, सप्लाई कमांडर मंगली, पीपीसी मेंबर जैनी। 1 लाख के इनामी : प्लाटून नंबर-1 की सदस्य भीमे व कुमारी, जनमिलिशिया कमांडर सनकू ।

बस्तर के आइजी विवेकानंद सिन्हा ने कहा, ऑपरेशन मानसून पूरी बरसात संभाग में जारी रहेगा। छत्तीसगढ़ की पहली बड़ी मुठभेड़ है, इसमें 8 माओवादी मारे गए। एक माह में माओवादियों के 19 लाल लड़ाकों को ढेर किया गया है।

एसपी कमलोचन कश्यप ने बताया कि पेन गन माओवादियों को होममेड हथियार है। 2012 में कोलकाता में बड़ी मात्रा में पेन गन को वहां की पुलिस ने बरामद किया था। यह हथियार पहली बार उसी दौरान सामने आया था। इस गन का इस्तेमाल माओवादियों की स्मॉल एक्शन टीम करती है। बस्तर में पहली बार इस हथियार की बरामदगी की गई है। हालांकि, पेन गन का इस्तेमाल यहां सालों से हो रहा है। समर्पित माओवादी बताते हैं कि यह अनोखा हथियार नहीं है। हाट-बाजार और शहरों में स्मॉल एक्शन टीम कई बार पेन गन से वारदात को अंजाम दे चुकी है। बांसुरी की तरह लोहे की पाइप से बनाया गया है।