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Digital Arrest: क्राइम ब्रांच का अफसर बन शिक्षिका को डराया, 4.50 लाख की कर दी ठगी

Digital Arrest: डरा-धमकाकर शिक्षिका को किसी को भी जानकारी न देने की हिदायत दी। भयभीत होकर शिक्षिका ने 19 से 25 मार्च के बीच किश्तों में 4,50,000 रुपए ट्रांसफर कर दिए।

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Digital Arrest: क्राइम ब्रांच का अफसर बन शिक्षिका को डराया, 4.50 लाख की कर दी ठगी

Digital Arrest: अंबिकापुर के गांधीनगर में शिक्षिका से 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए साढ़े चार लाख रुपए की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 19 मार्च को परीक्षा ड्यूटी से लौटीं शिक्षिका को अज्ञात व्यक्ति ने खुद को क्राइम ब्रांच रायपुर का अधिकारी बताकर कॉल किया। आरोपी ने उन पर गूगल पर अश्लील सामग्री देखने का झूठा आरोप लगाते हुए तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाया।

आरोपी ने डरा-धमकाकर शिक्षिका को किसी को भी जानकारी न देने की हिदायत दी। भयभीत होकर शिक्षिका ने 19 से 25 मार्च के बीच किश्तों में 4,50,000 रुपए ट्रांसफर कर दिए। ठग ने बाद में रकम वापसी का झांसा भी दिया, लेकिन मांग जारी रहने पर पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ। गांधीनगर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाया शिकार

गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाया शिकार ठगों ने शिक्षिका को तुरंत गिरफ्तारी की धमकी दी और कहा कि यदि वे बचना चाहती हैं, तो एक “सिक्योरिटी मनी” जमा करनी होगी, जो जांच पूरी होने के बाद लौटा दी जाएगी। इस धमकी से घबराकर शिक्षिका ठगों के झांसे में आ गईं।

धमकी जारी रखी

25 मार्च को ठगों ने दोबारा कॉल कर कहा कि तीन दिन बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। साथ ही यह भी धमकी दी कि यदि किसी को जानकारी दी गई तो उन्हें गिरफ्तार कर गंभीर नुकसान पहुंचाया जाएगा। शिक्षिका ने जब यह बात अपने सहयोगियों से साझा की, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

सावधानी ही बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

किस्तों में जमा कराया

ठगों की धमकी से डरकर महिला टीचर ने अलग-अलग दिन यूपीआई के जरिए किस्तों में चार लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर किए। टीचर ने 19 मार्च को 1 लाख रुपए, 20 मार्च को 90 हजार रुपए, 21 मार्च को 40 हजार रुपए, 22 मार्च को 45 हजार रुपए, 24 मार्च को 65 हजार रुपए और 25 मार्च को 50 हजार रुपए दो यूपीआई नंबरों में भेजे।