
छुआछूत ल भगाय बर लडि़स स्वतंत्रता संगराम सेनानी पोसूदास ह
छत्तीसगढ़ के बहुत अकन जिला म सतनामी आसरम बनाय गिस। ऐकर रखरखाव के सियानी पोसूदास ल दे गिस। इंकर नाव म सुरपा गांव के सरकारी हाईस्कूल ल रखे गे हे। फेर, गांव म इंकर मूरति नइ लगाय हे। जउन-जउन गांव म स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होय हें, वोकरमन के मूरति लगाय बर चाही। अजादी के 75 बछर पूर गे, ये काम हो जाना रिहिस हे।
जइसे अंगरेजमन ल हमर देस ले भगाना हे, तइसने छुआछूत के बिचार अउ वोकर मनई-जनई ल घलो भगाना हे। छत्तीसगढ़ के दुरूग जिला के तहसील पाटन एक अइसे जगा हे जिहां अजादी के लड़ई बर सबले जादा मनखे (स्वतंत्रता संगराम सेनानी) होइन। इंकर गिनती करे जाय त 67 झन होथें। ऐमन म सुरपा गांव के सतनामी समाज के महंत पोसूदास एक अइसे सेनानी होइस जउन ह छुआछूत के बिचार अउ ऐला मनई-करई ल भगाय के काम ल घलो करिस। महात्मा गांधी के कान म ये बात के जानबा होइस त छत्तीसगढ़ के दुरूग-रइपुर आइस।
महंत पोसूदास के जनम 1885 म मंगतुदास के घर सुरपा म होइस। समझे के उमर होइस तभे ले ‘मनखे-मनखे’ एक समान ल नइ मान समझे के जात ल देख के मनखे के बड़े-छोटे, ऊंच-नीच जइसे बतई-रहई ल देखिस त बड़ दुख म मर जाए। अइसन नइ होय बर चाही ये बात ल सोचिस-समझिस अउ छुआछूत भगाय के अपन बिचार ल अंगरेज भगाव वाला आंदोलन में जोड़ दिस। ए काम ल आगू आके करिस।
1920 बखत पंडित सुन्दरलाल सरमा, नारायन राव मेघावाले अउ कंडेल गांव के छोटेलाल सिरीवास्तव के अगुवई म कंडेल नहर सत्याग्रह सुरू होइस। ये बडक़ा स्वतंत्रता सेनानीमन के बिसवास वाला रिहिस। महंत पोसूदास ह सतनामी समाज के होय के सेती वोला हर काम म घलो आगू रखे जाय। पोसूदास ह पाटन अंचल के सतनामी समाज के मनखे छाटा गांव के मूलचंद चेलक, भूतनाथ, मचउद के सुकलदास महंत ल आगू लाइस। कंडल सत्याग्रह म भाग ले बर महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ आइस। 1926 म सुंदरलाल सरमा, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, घनस्याम सिंह गुप्त, महंत लछमीनारायन दासमन संग महंत पोसूदास ह अपन जात-समाज के संगवारीमन संग, हरिजनमन बर, इंकर उद्धार बर आंदोलन चलइन।
छत्तीसगढ़ के बहुत अकन जिला म सतनामी आसरम बनाय गिस। ऐकर रखरखाव के सियानी पोसूदास ल दे गिस अउ केंद्रीय प्रबंधक बनाय गिस। ये काम बर ङ्क्षकर संगवारी महंत हठाउदास, रेजूदास सोमनी, रूपदास सिरसिदा, धनीराम बंजारे धनोरा रिहिन। बरार (दान) ले के सतनामी आसरम बनाय के काम ल ऐमन करिन। अनुसूचित जाति (सतनामी) के कतको लइकामन इहां पढ़े बर रिहिन। ऐमा कतकोनझन सरकारी नउकरी के छोटे-बड़े पद म पहुंचिन। महात्मा गांधी के दूसरइया छत्तीसगढ. आना 22 ले 28 नवंबर 1933 म होइस। गांधीजी के इहू अवई ‘हरिजन उद्धार’ नाम बर होइस। गांधीजी ह सतनामी लइकामन बर बने आसरम अउ अनाथमन बर अनाथालय ल देखिस। ये मउका म रइपुर (रायपुर) के मौदहापारा म एक सभा म अपन बिचार रखिस।
24 नवंबर 1933 के दिन रइपुर के पुरानी बस्ती म एकठिन मंदिर म सतनामी समाज के मनखेमन संग गांधी दरसन करे बर अमइस। सुरपा वाले महंत घोसूदास, महंत पूरनदास, डेरहादास अउ समाज के कतकनो मनखेमन के बात बिचार ल मान के गांधीजी धमतरी के सतनामीपारा म गिस अउ सबेझन संग पंगत म बइठ के खाइस।
दुरुग (दुर्ग) के सतनामी आसरम के लइकामन संग गांधीजी के भेंट पोसूदास ह करवाइस। छुआछूट भगाव वाला काम बर पोसूदास के काम ल भुलाय नइ जा सकय। तरिया, कुआं, होटल, बासा जइसे सारवजनिक जगा ल छुआछूत के मनई ल छोड़वइस। पोसूदास जी के काम ल देख के सी.पी एंड बरार लेजेस्लेटिव कौंसिल के मेंबर बनाय गिस। (नामजद विधायक रिहिस।
पोसूदास ह अपन घर म एकठिन घोड़ी रखे रिहिस। ऐमा बइठ के सभा-सम्मेलन अउ लड़ई-झगरा के नाव लेके होय बिरोध वाला गांव म जाके निपटारा करे। अनीत अउ अन्याय के बिरोध म लड़त दबंगता ले जिइस।
1940 के गांधीजी के चलाय व्यक्तित सत्याग्रह (सविनय अवग्या) बर 50 स्वतंत्रता सेनानामी म मंजूरी दे गे रिहिस। वोमा दुरूग जिला के सातझन म एक पोसूदास घलो रिहिन। इंकर गिरफ्तारी होइस अउ 10 दिसंबर 1940 ले छह महीना बर कठोर सजा होइस। 12 दिसंबर 1940 के सेंट्रल जेल रइपुर ले नागपुर जेल घोसूदास ल भेज दे गिस। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन म भाग लिस अउ गिरफ्तार होके चार महीना के कठोर जेल के सजा भोगिस। 1950 म इंकर इंतकाल होइस।
पोसूदास ह छुआछूत के संबंध म काहय - जात-पात अपन ल बडक़ा अउ दूसर ल छोटे बनाय-बताय के एकठिन ओखी अउ उपाय हरे। छुआछूट, जात-पात दिमागी अउ अकल म रोग-राई आय। अंगरेजमन ल जइसे भगायेन तइसने छुआछूत ल भगाना हे। ऐहा एक-दूझन के काम नोहय। ऐहा सबो के काम आय। पोसूदास के सुवारी (पत्नी) के नाव पुरौतिन रिहिस। वोहा पाटन करा के मररा गांव ले आय रिहिस। इंकर तीन बेटा ईदल, लछमन अउ धनीराम होइस। ईदल अपन समे के मेटरिक पास रिहिस। महंत इंदलदास के नाव ले घलो जाने जाय। ईंदल के दू बेटा खेमलाल, पिकेस्वर अउ बेटी घनिस्ठा होइस। खेमलाल के दू बेटा हिम्मत अउ हितेन्द्र अउ बेटी चंद्रिका, अनिता, तारा हें। पोसूदास के दूसर बेटा लछमन के एक बेटा अमरदास रिहिस। इंकर बेटा चंद्रहास हे। चंद्रहास के कुबेर, सुभमन दू बेटा अउ बेटी वरसा, रुखमनी, जास्मिन, वंदना हे। पोसूदास के तीसर बेटा धनीराम के अंजोरदास एक बेटा होइस। ऐकर बेटा पप्पू हावय।
Published on:
16 Jan 2023 04:21 pm
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