
मनचाही फीस नहीं बढ़ा सकेंगे निजी स्कूल, शिकायत मिली तो जांच के बाद तत्काल मान्यता निरस्त
रायपुर. जिले के निजी स्कलों को पर सख्ती करने की तैयारी शिक्षा विभाग ने कर ली है। स्कूल प्रबंधन की मनमानी पर लगाम लगाने जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) ने कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी स्कूलों की शिकायत मिलने पर जाकर जांच की और इसकी रिपोर्ट बनाकर डीईओ को भेजेगी।
कमेटी की रिपोर्ट पर तत्काल अनुशंसा डीईओ के द्वारा की जाएगी और स्कूल की मान्यता खत्म करने की अनुशंसा शिक्षा विभाग की भेजी जाएगी। शिक्षा सत्र 2020-21 में पालको की जेब में डाका ना पड़े, इसलिए निजी स्कूलों को अभी से दिशा-निर्देश देना डीईओ ने शुरू कर दिया है।
बीईओ रैंक के अफसर रहेंगे कमेटी में
डीईओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार स्कूलों की मॉनीटरिंग करने के लिए जिस कमेटी का गठन विभागीय अधिकारियों ने किया है। उस कमेटी में बीईओ रैंक के अधिकारी शामिल है। बीईओ, संकुल प्रभारियों के साथ शिकायत मिलने पर जाकर जांच करेंगे और 1 हफ्ते के अंदर रिपोर्ट बनाकर डीईओ को देंगे। रिपोर्ट में अनुशंसा डीईओ करेंगे और स्कूल के खिलाफ कार्रवाई का आदेश निकल जाएगा।
853 स्कूल राजधानी में
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजधानी में 853 निजी स्कूल है। इन स्कूलों के संचालक अपनी मनमानी ना कर सके इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा सत्र 2019-20 से हर साल स्कूलों की मान्यता रिनूअल कराने का निर्देश दिया था। जिन स्कूल संचालकों की मनमानी की शिकायत डीईओ कार्यालय पहुंचेगी, उन स्कूलों की मान्यता रिनूअल के दौरान अटका दी जाएगी।
मार्च माह में फीस बढ़ोत्तरी पर चर्चा
जिले के स्कूल संचालक 2020-21 शिक्षा सत्र में कितनी फीस बढ़ा सकेंगे? इस प्रतिशत को निश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग और पालक संघ की बैठक मार्च माह में होनी है। शिक्षा सत्र 2019-20 में फीस बढ़ोत्तरी 10 प्रतिशत करने की चर्चा हुई थी, लेकिन पालक संघ ने इसका विरोध कर दिया।
पालक संघ के विरोध के चलते फीस बढ़ोत्तरी का प्रतिशत नहीं तय हो पाया और पूरे शिक्षा सत्र में निजी स्कूल के संचालको ने अपनी मनमानी की। शिक्षा सत्र 2020-21 में निजी स्कूल अपनी मनमानी ना करें, इसलिए मार्च माह में बैठक लेकर फीस वृद्धि प्रतिशत को प्रमुखता से तय करने की जिम्मेदारों ने ठानी है।
Published on:
13 Feb 2020 06:48 pm

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