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1857 से 33 साल पहले छत्तीसगढ़ में अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हो गई थी बगावत

यूं तो भारत की आजादी के लिए पहली बड़ी लड़ाई 1857 में हुई थी, लेकिन इससे पहले छत्तीसगढ़ में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत 1824 में ही शुरू हो गई थी।

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Ashish Gupta

Aug 15, 2016

revolt began against the British

independence day

रायपुर.
फिरंगियों के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ सन 1857 में पूरे देश में जोरदार आक्रोश फूटा, जिसे हम आजादी की पहली लड़ाई कहते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की यह कहानी उसके 33 साल पहले 1824 में ही शुरू हो गई थी। देश की आजादी के लिए छत्तीसगढ़ में हुए स्वतंत्रता संग्राम की एेसे ही अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं का इतिहास के पन्नों में विस्तार से उल्लेख है। आइए एेसे कुछ अनछुए पहलुओं पर नजर डालते हैं-


सन 1824 में अबूझमाड़ के परलकोट क्षेत्र के वीर गैंदसिंह वनवासियों को छापामार युद्ध सिखा रहे थे। अंग्रेजों को इसकी खबर लगी। उन्होंने कर्नल एगन्यू के नेतृत्व में फौज को भेजा। गैंदसिंह की फौज जमकर लड़ी, लेकिन वे गिरफ्तार कर लिए गए और 10 जनवरी 1825 को परलकोट महल के सामने उन्हें फांसी दे दी गई।


आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के महान योद्धाओं में सोनाखान के वीरनारायण सिंह का महत्वपूर्ण संघर्ष भूला नहीं जा सकता है। वीरनारायण सिंह ने सन 1858 में रायपुर स्थित अंग्रेजों की फौजी छावनी (तीसरी रेग्यूलर रेजिमेंट) के सिपाही ठाकुर हनुमान सिंह के नेतृत्व में हुए सशस्त्र बगावत में अहम योगदान दिया था। इस क्रांति के नायक बने सत्रह भारतीय सिपाहियों को फिरंगियों ने पुलिस लाइन रायपुर में खुलेआम तोप से उड़ा दिया था।


इस पूरे माहौल के बीच सन १876 में छत्तीसगढ़ में एक अनोखा विद्रोह भी शुरू हुआ, जिसे मूरिया विद्रोह कहा जाता है, जो बस्तर में शुरू हुआ। सन 1910 में वीर गुण्डाधूर के नेतृत्व में बस्तर के भूमकाल विद्रोह भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। सन 1918 में बिहार से शुरू हुए ताना भगत आंदोलन की लपटें सरगुजा अंचल में भी फैल गई थी और उसमें कई सेनानी शहीद हुए थे।


आजादी की लड़ाई के दौरान सन 1920 और सन 1933 में महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास आए। आजादी की लड़ाई में पंडित सुन्दरलाल शर्मा, माधवराव सप्रे, महंत लक्ष्मी नारायण दास, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, पंडित वामनराव लाखे, डॉ. खूबचंद बघेल, इंदरू केवट, डॉ. राधाबाई, मिनी माता जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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