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हजारों सालों से छुपा इस शहर का रहस्य आया सामने, सेटेलाइट से दिखता है ‘ऊं’ आकार का

 भोपाल सेटेलाइट से देखने पर ओमबैली के रूप में बसाया गया था। वैज्ञानिकों की मानें तो यहां हजारों साल पुरानी एक ओमवैली है। 

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Abhishek Jain

Jul 02, 2017

Bhopal built as Om Valley

Bhopal built as Om Valley

भोपाल/रायपुर. देश का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती है। भोपाल की आवोहवा कुछ इस तरह की है कि डॉक्टर्स भी मरीजों को स्वस्थ्य होने के लिए रहने की सलाह देते हैं। भोपाल का भौगोलिक, इतिहासिक, सास्कृतिक महत्व अपने आप में गौरवशाली है लेकिन वैज्ञानिकों ने भोपाल के बारे में जो नया रहस्य बताया है उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। बिल्कुल यदि उनकी माने तो भोपाल सेटेलाइट से देखने पर ओमबैली के रूप में बसाया गया था। वैज्ञानिकों की मानें तो यहां हजारों साल पुरानी एक ओमवैली है। मॉनसून के समय ये ओमवैली पूरी तरह से सामने आ जाती है। यहां पर मौजूद हरियाली के बढ़ने और जलाशय भरने के बाद ओमवैली की तस्वीरें पूरी तरह से साफ नजर आती हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों में इस बात की पुष्टि भी होती है। इस ओम के मध्य में स्थित है प्राचीन भोजपुर मंदिर, और इसके सिरे पर बसा है भोपाल शहर। आपको ये भी बता दें कि भूगोल विज्ञानियों का ये मानना है कि भोपाल शहर स्वास्तिक के आकार में बसाया था। मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक ठीक उसी वक्त ओम वैली का ग्राउंड डाटा लेते हैं, जिस वक्त सैटेलाइट रिसोर्स सेट - 2 भोपाल शहर के ऊपर से गुजरता है। इस दौरान भोपाल, भोजपुर और ओमवैली की संरचना से जुड़ा हुआ डाटा लिया जाता है। परिषद के मुताबिक हर 24 दिनों के अंतराल पर ये सेटेलाइट भोपाल शहर के ऊपर से गुजरता है। इस सैटेलाइट के जरिए गेहूं की खेती वाली जमीन की तस्वीरें ली जाती हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रहा ये बड़ा सा ओम दरअसल सदियों पुरानी ओम वैली है। आसमान से दिखाई देने वाली ॐ वैली के ठीक मध्य में 1000 वर्ष प्राचीन भोजपुर का शिवमंदिर स्थापित है। मध्यप्रदेश में ओमकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के पास भी ऐसी ही प्राकृतिक ओमवैली दूर आसमान से दिखाई देती है। वैज्ञानिकों की नजर में यह ओम वैली है। इसके सैटेलाइट डाटा केलिबरेशन और वैलिडेशन का काम मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद को मिला है।

परिषद के वैज्ञानिक डॉ. जीडी बैरागी ने बताया, डाटा केलिबरेशन और वैलिडेशन के लिए हमें ठीक उस वक्त ओम वैली का ग्राउंड डाटा लेना होता है, जिस समय सैटेलाइट (रिसोर्स सेट-2) शहर के ऊपर से गुजरे। यह सैटेलाइट 24 दिनों के अंतराल पर भोपाल के ऊपर से गुजरता है। इससे गेहूं की खेती वाली जमीन की तस्वीरें ली जाती हैं।

परिषद की ताजा सैटेलाइट इमेज से च्ॐज् वैली के आसपास पुराने भोपाल की बसाहट और एकदम केंद्र में भोजपुर के मंदिर की स्थिति स्पष्ट हुई है। पुरातत्वविदों के पास राजा भोज की विद्वता के तर्क हैं। उनके मुताबिक लगभग 1000 साल पहले ही भोपाल को एक स्मार्ट सिटी बनाने के लिए इसे ज्यामितीय तरीके से बसाया गया था, इसे बसाने में राजा भोज की विद्वता से ही सारी चीजें संभव हो पाईं थीं।

इतिहासकारों का मानना है कि भोज एक राजा ही नहीं कई विषयों के विद्वान थे। भाषा, नाटक, वास्तु, व्याकरण समेत अनेक विषयों पर 60 से अधिक किताबें लिखी। वास्तु पर लिखी समरांगण सूत्रधार के आधार पर ही भोपाल शहर बसाया गया था। गूगल मैप से वह डिजाइन आज भी वैसा ही देखा जा सकता है।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आर्कियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ओम की संरचना और शिव मंदिर का रिश्ता पुराना है। देश में जहां कहीं भी शिव मंदिर बने हैं, उनके आसपास के ओम की संरचना जरूरी होती है। इसका सबसे नजदीकी उदाहरण है ओंकारेश्वर का शिव मंदिर।

परमार राजा भोज के समय में ग्राउंड मैपिंग किस तरह से होती थी इसके अभी तक कोई लिखित साक्ष्य तो नहीं है, लेकिन यह रिसर्च का रोचक विषय जरूर है। सैटेलाइट इमेज से यह बहुत स्पष्ट है कि भोज ने जो शिव मंदिर बनवाया, वह इस ओम की आकृति के बीचोबीच स्थापित है।