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वन बचाने केंद्र की रूचि नहीं, देश का 8वां बायोस्फीयर रिजर्व अटका फाइलों में

देश के 8वें अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर की फाइलें बीते 4 सालों से ठंडे बस्ते में हैं। रिपोर्ट के बाद छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने एक साल पहले कार्ययोजना भी बना ली, लेकिन इसके आगे काम नहीं हुआ

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Chandu Nirmalkar

Apr 15, 2016

biosphere reserve

biosphere reserve

रायपुर/विनोद डोंगरे.
देश के 8वें अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर की फाइलें बीते 4 सालों से ठंडे बस्ते में हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बड़े वन भूभाग को एक साथ मिलाते हुए वन्यप्राणी, पादप प्रजातियां, जनजातीय परंपरा के संरक्षण और संवर्धन की परिकल्पना के साथ शुरू इस परियोजना के लिए 5 साल पहले वैज्ञानिकों ने सर्वे भी किया। रिपोर्ट के बाद छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने एक साल पहले कार्ययोजना भी बना ली, लेकिन इसके आगे काम नहीं हुआ। अधिकारियों का कहना है कि जब तक केन्द्र सरकार से कोई दिशा निर्देश नहीं मिलता, तब तक आगे कोई काम नहीं होगा।



वर्ष-2005 में केन्द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एजेंसी एफएसआई (भारतीय वन सर्वेक्षण) के निर्देश पर अमरकंटक-अचानकमार 3835.51 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में संरक्षित करने की योजना बनी थी। इसके लिए तमाम कानूनी प्रक्रियाएं करते-करते पांच साल गुजर गए।


2011-12 में एफएसआई के ही निर्देश पर टीएफआरआई, जबलपुर (ट्रॉपिकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) के वैज्ञानिकों ने ग्राउंड सर्वे किया और 13 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और केन्द्रीय वन मंत्रालय को भी दी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर एफएसआई ने दोनों राज्यों के वन विभागों को कार्ययोजना बनाने को कहा। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने पिछले साल कार्ययोजना बनाई, लेकिन उसके बाद न तो फंड मिला न निर्देश। अब मामला ठंडा पड़ा है।