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पटना हॉस्टल केस: क्या जानबूझकर मिटाए गए अहम सबूत? FSL रिपोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस में FSL की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। धुली हुई चादरें और दूसरे फोरेंसिक सबूतों ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 25, 2026

पटना शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड | patna hostel case | Patna NEET Student Death Case

शंभू गर्ल्स हॉस्टल

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शुरुआत में, पुलिस ने इस मामले को 'डिप्रेशन' और 'नींद की गोलियों' का मामला बताकर खारिज करने की कोशिश की थी। हालांकि, FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट ने इस कहानी को पूरी तरह से पलट दिया है। फोरेंसिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि छात्रा के साथ बर्बरता की गई थी। इतना ही नहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा जांच के लिए FSL को भेजी गई बेडशीट धोई हुई थी।

धुली हुई बेडशीट FSL भेजी गई

सूत्रों के मुताबिक, जिस बेडशीट पर स्टूडेंट बेहोश मिली थी और जिस पर उसने कथित तौर पर उल्टी की थी, उसे पुलिस ने फोरेंसिक जांच के लिए FSL भेजा था। लेकिन, जब FSL एक्सपर्ट्स ने इसकी जांच की, तो यह साफ हो गया कि चादर पहले ही धुली हुई थी। जांच के दौरान डिटर्जेंट पाउडर के निशान मिले, जिससे यह लगभग पक्का हो गया कि बेडशीट पर मौजूद कोई भी संभावित बायोलॉजिकल सबूत, जैसे शरीर के तरल पदार्थ, उल्टी या दूसरे केमिकल निशान, पहले ही नष्ट कर दिए गए थे। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि ऐसी धुली हुई चीज से ठोस सबूत हासिल करना बहुत मुश्किल है।

लापरवाही या सबूतों के साथ छेड़छाड़?

आपराधिक मामलों में किसी भी संभावित सबूत को बिना किसी छेड़छाड़ के सीलबंद हालत में फोरेंसिक जांच के लिए भेजना प्रोसेस का एक जरूरी हिस्सा है। हालांकि, ऐसा लगता है कि इस मामले में इस प्रोसेस का पालन नहीं किया गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बेडशीट को बिना धुले FSL भेजा गया होता, तो उस पर मौजूद बायोलॉजिकल सबूत जांच की दिशा पूरी तरह बदल सकते थे। ऐसे में अब सवाल उठने लगी हैं कि क्या यह सिर्फ बड़ी लापरवाही थी या सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने की कोशिश थी।

अंडरवियर पर मिले सीमेन के दाग

फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के कपड़ों (लेगिंग्स) पर इंसान के सीमेन के निशान मिले हैं। इसके बाद, SIT ने अब इन बायोलॉजिकल सैंपल की DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि उन्हें गिरफ्तार आरोपी और अन्य संदिग्धों से मिलाया जा सके। यह खुलासा उस शुरुआती पुलिस थ्योरी पर भी सवाल खड़ा करता है, जिसमें यौन शोषण से इनकार किया गया था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना का जिक्र

इससे पहले, PMCH मेडिकल बोर्ड की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी कहा गया था कि सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर चोट के निशान और उसके प्राइवेट पार्ट्स को नुकसान होने का जिक्र था। एक्सपर्ट की राय के लिए रिपोर्ट को AIIMS भेजा गया था, लेकिन अभी तक फाइनल मेडिकल राय नहीं मिली है। AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि रिव्यू में देरी पूरी मेडिकल फाइल न मिलने की वजह से हो रही है।

SIT ने AIIMS को नहीं भेजी पूरी फाइल

पिछले एक हफ्ते से, केस की जांच के लिए AIIMS पटना के एक्सपर्ट्स की एक टीम बनाई गई है। हालांकि, AIIMS में फोरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड डॉ. विनय कुमार ने कहा है कि SIT ने अभी तक पूरी मेडिकल फाइल और जरूरी डॉक्यूमेंट्स नहीं सौंपे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि मेडिकल रिकॉर्ड मिलने में देरी से रिव्यू प्रोसेस में रुकावट आ रही है और किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

परिजनों ने सिस्टम पर उठाए सवाल

मृतक का परिवार शुरू से ही पुलिस की जांच से खुश नहीं है। उनका आरोप है कि शुरुआती दौर में, केस के जरूरी पहलुओं को नजरअंदाज किया गया और इसे सुसाइड या बीमारी बताकर टाल दिया गया। हॉस्टल को कई दिनों तक सील नहीं किया गया, जिससे अपराधियों को कमरा साफ करने और सबूत मिटाने का पूरा समय मिल गया। इसके अलावा, पुलिस ने शुरू में जो "डायरी" और "डिप्रेशन" की बात कही थी, उसे अब मनगढ़ंत थ्योरी माना जा रहा है। परिवार का कहना है कि हर नए खुलासे के साथ, यह और भी ज्यादा गंभीर होता जा रहा है।

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