हालांकि, प्रदेश में कर्ज के कारण एक भी आत्महत्या नहीं दर्शाई गई है, लेकिन कृषि जानकारों का मानना है कि यहां सरकारी एजेंसियों के बजाय सूदखोरी पर ब्याज लेने की प्रचलन है, जो इन आत्महत्याओं की मुख्य वजह हो सकती है। बीमारी से 12 महिलाओं सहित 110 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि पारिवारिक समस्या के चलते 59 किसानों ने जान दे दी। इतना ही नहीं, 14 किसानों ने फसल नहीं बिकने पर, 4 किसानों ने फसल बर्बादी और दो किसानों ने प्राकृतिक आपदा से फसल खराबा पर आत्महत्या कर ली। प्रदेश में 28 किसानों की आत्महत्या की वजह नशे की आदत रही।