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Raipur city… 20 वाटर एटीएम अब खुद पानी के लिए तरस रहे…लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं

रायपुर शहर (Raipur city)में लगे 20 वाटर एटीएम (20 water ATMs) अब खुद पानी के लिए तरस रहे हैं। गर्मी में जब हर बूंद पानी कीमती (In summers when every drop of water is precious) है, ऐसे में इन वाटर एटीएम को लेकर जिम्मेदार की लापरवाही और मेंटेनेंस की कमी के कारण लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। वर्षों पहले नगर निगम ने स्वच्छ जल की सुविधा देने के उद्देश्य से इन वाटर एटीएम को स्थापित किया था, लेकिन अब ये सभी सिर्फ पानी के लिए तरस रहे हैं और बंद पड़े हैं।

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Raipur city... 20 वाटर एटीएम अब खुद पानी के लिए तरस रहे...लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं

Raipur city... 20 वाटर एटीएम अब खुद पानी के लिए तरस रहे...लोगों को स्वच्छ पानी नसीब नहीं

2018 में शुरू अब बंद

वर्ष 2018 में राहगीरों और आम लोगों के लिए 20 वाटर एटीएम लगाए गए थे, लेकिन कुछ वर्षों बाद ही ये मेंटेनेंस के अभाव में बंद हो गए। बताया जा रहा है कि नगर निगम रायपुर द्वारा सही से मेंटेनेंस राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण ठेकेदार ने मशीनें निगम को हैंडओवर कर दी। अब हालात ये हैं कि ये एटीएम गर्मी के मौसम में लोगों के लिए पानी का सबसे बड़ा संकट बन चुके हैं।

अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा

निगम के अधिकारियों ने टेंडर की प्रक्रिया और मेंटेनेंस राशि को लेकर बड़ी लापरवाही दिखाई है। जब प्रदेश के अन्य 10 नगर निगमों में जल एटीएम चालू हैं और वहां ठेकेदार को मेंटेनेंस का पैसा मिल रहा है तो रायपुर में क्यों ठेकेदार का भुगतान रोका गया? वाटर एटीएम के पूर्व ठेकेदार धर्मेन्द्र शाह का कहना है कि इन एटीएम में आरओ प्रणाली लगाना जरूरी था, क्योंकि राजधानी के बोर से निकलने वाले पानी का टीडीएस बहुत ज्यादा है। यही कारण है कि ये एटीएम सिर्फ यूवी वाटर से काम नहीं कर सकते थे। हालांकि, उन्होंने अधिकारियों को जानकारी दी थी, लेकिन अधिकारियों ने उनके आवेदन पर ध्यान नहीं दिया।

सर्वे के बाद एटीएम की चाबी सौंपी

ठेकेदार ने भुगतान नहीं मिलने पर वाटर एटीएम की चाबी निगम को सौंप दी। इसके बाद निगम ने तीन महीने के लिए एक अन्य ठेकेदार को एटीएम चलाने का जिम्मा सौंपा और उसे 8 लाख रुपए का भुगतान किया। लेकिन इस भुगतान के बाद भी एटीएम फिर से बंद हो गए। अब हालात ये हैं कि कई एटीएम गायब होने की भी चर्चा हो रही है।

20 लाख 50 हजार का भुगतान भी नहीं

राज्य सरकार द्वारा वाटर एटीएम के मेंटेनेंस के लिए 20 लाख 50 हजार रुपए जारी किए गए थे, लेकिन ठेकेदार को यह राशि नहीं दी गई। इस भुगतान को रोकने के बाद ठेकेदार ने अपना काम बंद कर दिया और एटीएम की चाबी निगम के हवाले कर दी।

अब फिर से सर्वे कराया जा रहा

6 साल के लिए टेंडर किया गया था, लेकिन ठेकेदार ने 6 साल के लिए रेट नहीं डाला था, बल्कि प्रतिवर्ष के लिए रेट डाला था। ठेकेदार ने बीच में टेंडर छोड़ दिया था, जिसके बाद तीन माह के लिए एटीएम चालू किया गया था। अब फिर से सर्वे कराया जा रहा है, ताकि स्थिति का आंकलन किया जा सके।

  • कृष्णादेवी खटीक, प्रभारी अधिकारी, नगर निगम जल विभाग