
CG Crime News: बैंक और एटीएम से बिना रकम निकाले ही किसान के खाते से 1 लाख 33890 रुपए पार हो गया। शिकायत करने के बाद भी एसबीआई द्वारा रकम वापस नहीं लौटाने पर पीड़ित किसान ने राज्य उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई। साथ ही बताया कि उसे मालूम ही नहीं की रकम उसके खाते से कैसे निकल गई। इसे कहां और किसके द्वारा निकाला गया है। बैंक जाने पर इसकी जानकारी मिली।
पूछताछ करने पर कोई संतोष जनक जवाब नहीं देने पर स्थानीय पुलिस थाने और जिला उपभोक्ता फोरम जांजगीर-चांपा में आवेदन किया था। जहां जिला फोरम ने उसके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद भी रकम वापस नहीं लौटाया गया। आयोग अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा ने नोटिस जारी कर एसबीआई से जवाब मांगा। साथ ही प्रकरण की सुनवाई करते हुए किसान को 27 जुलाई 2023 से रकम की अदायगी तक 6 फीसदी ब्याज दर के साथ 1 लाख 33890 रुपए लौटाने और वाद व्यय एवं मानसिक क्षतिपूर्ति की राशि 24000 रुपए अदा करने का आदेश दिया है।
यह है मामला
जांजगीर-चांपा (सक्ती) स्थित भारतीय स्टेट बैंक में ग्राम चुरतेली थाना डभरा निवासी का बचत खाता खोला था। एटीएम मशीन से पैसा नहीं निकाल पाने और कार्ड नहीं चला पाने के कारण उसने लिया ही नहीं था। लेन-देन के लिए बैंक जाकर मैन्युअल पर्ची का इस्तेमाल करता था। 17 नवंबर 2021 को वह 1 लाख रुपए निकालने के लिए बैंक गया। जहां उसे पता चला कि उसके खाते में इतनी रकम नहीं है। जबकि उसके पास बुक में 1 लाख रुपए से ज्यादा की इंट्री थी। पूछताछ करने पर पता चला कि अप्रैल से अगस्त 2020 के बीच 16 बार उसके खाते से 1 लाख 33890 रुपए निकाले गए थे। स्थानीय बैंक मैनेजर से शिकायत करने और उसे घटना की जानकारी देने के बाद भी कोई राहत नहीं मिलने पर डभरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही 2022 में जिला उपभोक्ता फोरम जांजगीर-चांपा में आवेदन दिया। जहां उसके पक्ष में 27 जुलाई 2023 को फैसला देते हुए एसबीआई को 45 दिन के भीतर 1 लाख 33890 वापस करने का आदेश पारित किया।
आयोग ने की सुनवाई
किसान की अपील पर आयोग ने एसबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इस दौरान पता चला कि उसके बैंक खाते में भाई का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर है। वहीं महाराष्ट्र के ठाणे जिले से आधार इनेबल पेंमेंट सिस्टम (एईपीएस) मोबाइल एटीएम सेंटर से रकम निकाली गई है। यह राशि ऑनलाइन कस्टमर सर्विस सेंटर (कियोस्क ब्रांच) से उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर का प्रयोग कर रकम का आहरण किया गया है। सुनवाई में बैंक ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि खाता धारक के खाते में उसका आधार नंबर एवं मोबाइल नंबर लिंक कराया गया था।
उक्त मोबाइल नंबर खाताधारक के भाई का होना पाया गया। बैंक ने किसान के खाते में किसी अन्य व्यक्ति के आधार कार्ड एवं मोबाइल नम्बर को जोडकर घोर लापरवाही कर सेवा में कमी की गई है। इसके कारण एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके खाते से अनाधिकृत रूप से राशि का आहरण किया गया। किसान कभी अपने गांव से बाहर गया ही नहीं है। इन परिस्थितियों में उसके द्वारा रकम निकलना संभव नहीं है। बैंक ने खाता खोलते समय लापरवाही बरतते हुए किसी अन्य का मोबाइल नंबर और आधार को लिंक किया। बैंक द्वारा सेवा में कमी करने की वजह से किसान के खाते से रकम पार हुई है। आहरित राशि एवं मानसिक क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय देने का आदेश पारित किया।
Published on:
09 Feb 2024 11:17 am

